LNJP में भर्ती कोरोना के 136 में से 130 मरीज अन्य बीमारियों का इलाज कराने आए थे: केजरीवाल

अरविंद केजरीवाल ने कहा, पिछली लहर के दौरान बड़ी संख्या में कोविड रोगियों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती करना पड़ा था।

HIGHLIGHTS

  • पिछली लहर के दौरान बड़ी संख्या में कोविड रोगियों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती करना पड़ा था: केजरीवाल
  • दिल्ली में सोमवार और मंगलवार को कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से 17-17 मरीजों को जान गंवानी पड़ी।
  • केजरीवाल ने कहा, विभिन्न अस्पतालों में अभी करीब 2000 कोविड रोगियों का उपचार चल रहा है।

/किशन श्रीवास्तव समय जगत नयी दिल्ली: /दिल्ली स्थित LNJP  अस्पताल के 136 कोविड रोगियों में से 130 अन्य रोगों का उपचार कराने आए थे, लेकिन भर्ती होते समय वे कोरोना वायरस संक्रमित पाए गए। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को लोक नायक जय प्रकाश नारायण (LNJP ) में हालात की समीक्षा करने के बाद कहा कि अस्पताल में भर्ती सिर्फ 6 मरीज ही कोरोना का इलाज कराने के लिए आए थे। उन्होंने यह भी कहा कि राजधानी में कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर पिछले साल अप्रैल की भीषण मारक लहर की तुलना ‘बहुत मामूली’ है।

‘अस्पताल में भर्ती होने वालों की संख्या अभी बहुत कम’

केजरीवाल ने कहा, ‘पिछली लहर के दौरान बड़ी संख्या में कोविड रोगियों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती करना पड़ा था। लेकिन यह संख्या इस बार बहुत कम है। विभिन्न अस्पतालों में अभी करीब 2000 कोविड रोगियों का उपचार चल रहा है। मुझे पूरा विश्वास है कि जो लोग केवल कोविड-19 से संक्रमण के कारण उपचार कराने आ रहे हैं, उनकी संख्या बहुत कम है।’ उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस संक्रमण के मामले भले ही बढ़ रहे हैं, किंतु अस्पताल में भर्ती होने वालों की संख्या अभी बहुत कम है, और कोरोना संक्रमण से मरने वालों की संख्या भी अपेक्षाकृत कम है, किंतु सरकार किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।

‘जनवरी के पहले 10 दिनों में 70 मरीजों की मौत’
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, राजधानी में जनवरी महीने के पहले 10 दिनों में कुल 70 कोविड रोगियों की मौत हुई। दिल्ली में सोमवार और मंगलवार को कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से 17-17 मरीजों को जान गंवानी पड़ी। दिल्ली में इसके पहले पिछले 5 महीनों के दौरान केवल 54 कोविड रोगियों की मौत दर्ज की गई थी। इससे पहले दिन में स्वास्थ्य विभाग ने यह परामर्श जारी कर सभी अस्पतालों से कहा था कि गंभीर एवं अन्य बीमारियों से पीड़ित कोविड रोगियों पर विशेषज्ञ समुचित ध्यान दें। ताजा स्वास्थ्य बुलेटिन के अनुसार अस्पतालों में भर्ती 1912 रोगियों में से 65 वेंटिलेटर पर हैं।

स्वामी प्रसाद मौर्य के इस्तीफे के बाद डैमेज कंट्रोल में जुटी भाजपा, अखिलेश बोले- मेला होबे

किशन श्रीवास्तव दैनिक समय जगत लखनऊ उत्तर प्रदेश में विधान सभा चुनाव की घोषणा के बाद योगी मंत्रिमंडल से इस्तीफा देकर स्वामी प्रसाद मौर्य ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को ऐन वक्त पर करारा झटका देकर मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इसके मद्देनजर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने मौर्य के इस्तीफे से आगामी चुनाव में संभावित नुकसान की भरपाई के लिये मौर्य को मनाने की कवायद तेज कर दी है।

मंगलवार को मौर्य द्वारा मंत्री पद से और उनके करीबी विधायकों ब्रजेश प्रजापति (तिंदवारी), रौशन लाल वर्मा (तिलहर), विनय शाक्य (बिधूना) और भगवती सागर (बिल्हौर) के भी भाजपा से मोह भंग होने की घोषणा के बाद एक तरफ भाजपा ने ‘डेमेज कंट्रोल’ करना शुरू कर दिया है। वहीं, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मौर्य सहित तमाम भाजपा विधायकों के सपा में शामिल होने की अटकलों को ‘उपेक्षितों का मेला’ बताते हुए नया जुमला दिया, राजनीति का मेला होबे।”

अखिलेश ने ट्वीट कर कहा, ”इस बार सभी शोषितों, वंचितों, उत्पीड़ितों, उपेक्षितों का ‘मेल’ होगा और भाजपा की बाँटने व अपमान करनेवाली राजनीति के ख़िलाफ़ सपा की सबको सम्मान देने वाली राजनीति का इंक़लाब होगा। बाइस में सबके मेल मिलाप से सकारात्मक राजनीति का ‘मेला होबे’। भाजपा की ऐतिहासिक हार होगी।” इस बीच मौर्य के करीबी विधायक ब्रजेश प्रजापति ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह को अपना इस्तीफा भेज कर पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ने का ऐलान किया।

इसके साथ ही हरकत में आए भाजपा नेतृत्व ने मौर्य को मनाने की कोशिशें तेज कर दी। मौर्य के इस्तीफे की खबर नुमांया होते ही सबसे पहले उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने स्वामी प्रसाद मौर्य से जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं करने का सुझाव देते हुये आपस में बैठकर बातचीत करने की अपील की। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ”आदरणीय स्वामी प्रसाद मौर्य जी ने किन कारणों से इस्तीफा दिया है मैं नहीं जानता हूँ उनसे अपील है कि बैठकर बात करें जल्दबाजी में लिये हुये फैसले अक्सर गलत साबित होते हैं।”

समझा जाता है कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने भी स्वामी प्रसाद मौर्य से संपर्क साध कर उन्हें मनाने की पहल की है। हालांकि योगी सरकार में मंत्री नंदगोपाल नंदी ने मौर्य के मंत्री पद से इस्तीफे को ”विनाश काले विपरीत बुद्ध” करार दिया।

चुनाव से पहले फिर बागी हुए नवजोत सिंह सिद्धू के सुर, कहा- CM हाईकमान नहीं पंजाब के लोग बनाएंगे

/ किशन श्रीवास्तव समय जगत चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू एक बार फिर से बागी तेवर में नजर आ रहे हैं। कांग्रेस के जीतने के बाद भी खुद को सीएम बनाए जाने की क्या गारंटी है? इस सवाल पर नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा, ‘आप मुझे एक बात बताओ कि हर आदमी सीएम बन सकता है क्या? दूसरी बात यह है कि सीएम हाईकमान नहीं बनाता है बल्कि पंजाब के लोग बनाते हैं।’

सिद्धू ने कहा कि विधायक भी 5 साल पहले पंजाब के लोगों ने ही बनाए थे और फिर उनसे ही सीएम चुना गया। इस बार भी पंजाब के लोगों को ही तय करना है कि विधायक बनेंगे या नहीं। यह तभी होगा, जब कोई अजेंडा होगा। इसलिए आप किसी भ्रम में न रहें। पंजाब के लोगों को ही विधायक बनाने हैं और उन्हें ही सीएम बनाने हैं।

कई मौकों पर आमने-सामने दिखे चन्नी और सिद्धू
सिद्धू लगातार विभिन्न मुद्दों पर अमरिंदर सरकार पर हमले करते रहे। वह चन्नी के साथ भी सहज नहीं रहे हैं और नई सरकार के मुखर आलोचक के रूप में उभरे हैं। सिद्धू महाधिवक्ता ए.पी.एस. देओल के साथ पिछले साल नवंबर में डीएस पटवालिया और दिसंबर में राज्य के डीजीपी आईपीएस अधिकारी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय सहोता की नियुक्ति को लेकर मुखर हुए। पंजाब और कांग्रेस के सियासी हलकों में यह चर्चा आम है कि सिद्धू मुख्यमंत्री पद की महत्वाकांक्षा रखते हैं।

सीएम कैंडिडेट पर क्या है कांग्रेस की राय?
सिद्धू के दबाव में कांग्रेस ने अब तक चन्नी को आगामी चुनाव में पार्टी के सीएम चेहरे के रूप में पेश करने से परहेज किया है। पार्टी का कहना है कि चुनाव सामूहिक नेतृत्व में लड़ा जाएगा। फिर भी सिद्धू आलाकमान पर उन्हें सीएम उम्मीदवार घोषित करने का दबाव बना रहे हैं। हालांकि, कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों का मानना ​​है कि सिद्धू की किसी भी तरह की पदोन्नति दलितों और उच्च जाति हिंदुओं दोनों के बीच पार्टी की संभावनाओं को नुकसान पहुंचा सकती है।

पंजाब के लिए सिद्धू पेश कर रहे हैं अपना विकास मॉडल
इस बीच सिद्धू पंजाब के लिए अपना खुद का विकास मॉडल लोगों के सामने पेश कर रहे हैं। प्रताप बाजवा के नेतृत्व वाली घोषणापत्र समिति अभी भी मसौदे पर काम कर रही है। जहां तक ​​चुनाव की बात है तो सिद्धू को अपने ही निर्वाचन क्षेत्र अमृतसर पूर्व में कड़ी मेहनत करनी पड़ सकती है। जाहिर तौर पर ज्यादातर कांग्रेस नेता चाहते हैं कि वह वहां की लड़ाई हार जाएं। अमृतसर पूर्व के निवासी अक्सर उनकी अनुपलब्धता की शिकायत करते हैं। इससे पहले सिद्धू की पत्नी यहीं से विधायक थीं।

सीएम के 80 बनाम 20 वाले बयान पर बोली प्रियंका, युवाओं के मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं योगी

/किशन श्रीवास्तव दैनिक समय जगत नयी दिल्ली। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने मंगलवार को कहा कि यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा इस विधानसभा चुनाव में 80 बनाम 20 फीसदी’ की बात करना युवाओं के मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास है। उन्होंने एक खबर का हवाला देते हुए ट्वीट किया, उप्र के चुनावों में जैसी बातें करना चार सौ बीसी कर युवाओं के मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास है। असलियत यह है कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार के कार्यकाल में प्रति 100 लोगों में से 68 के पास काम नहीं है।

प्रियंका गांधी ने कहा, मेरे युवा दोस्तों, अपनी शक्ति से उप्र के चुनावों को रोजगार, शिक्षा जैसे मुद्दों का चुनाव बनाएं। गौरतलब है कि योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को कहा कि आगामी चुनाव 80 बनाम 20 फीसदी के बीच होगा और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) राष्ट्रवाद, सुशासन और विकास के मुद्दे पर विधानसभा चुनाव लड़ेगी। उन्होंने कहा था, 80 फीसदी समर्थक एकतरफ होंगे, जबकि 20 फीसदी दूसरी तरफ। मुझे लगता है कि 80 फीसदी लोग सकारात्मक ऊर्जा के साथ आगे बढ़ेंगे जबकि 20 फीसदी ने हमेशा विरोध किया है, आगे भी विरोध करेंगे लेकिन सरकार भाजपा की आएगी। भाजपा फिर ‘सबका साथ सबका विकास’ के अभियान को आगे बढ़ाने का काम करेगी।

 

टिकट कटने के डर से भाजपा छोड़ गए स्वामी और उनके समर्थक! पहले से थे नाराज; योगी का नेतृत्व नहीं था मंजूर

/किशन श्रीवास्तव दैनिक समय जगत लखनऊ/ योगी सरकार में श्रम मंत्री रहे स्वामी प्रसाद मौर्य ने योगी मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है। अखिलेश यादव ने ट्वीट कर बताया है कि स्वामी प्रसाद मौर्य अब सपा में शामिल हो गए हैं। मौर्य के इस्तीफे के तुरंत बाद उनके कुछ अन्य समर्थक विधायकों ने भी बीजेपी छोड़ने का ऐलान कर दिया। इन नेताओं के इस्तीफे की खबरें भले ही अचानक आईं हों, लेकिन इन नेताओं की नाराजगी को लेकर संकेत पहले ही मिल चुके थे। बीजेपी से जुड़े सूत्रों का यह भी कहना है कि मौर्य योगी की कप्तानी को चुनौती दे चुके थे और इस वजह से उनका टिकट कट सकता था या फिर बीजेपी के दोबारा सत्ता में आने के बाद उन्हें साइडलाइन किए जाने का डर सता रहा था।

योगी का सीएम रहना नहीं था पसंद?
माना जा रहा है कि स्वामी प्रसाद मौर्य योगी के नेतृत्व से खुश नहीं थे। पिछले साल उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह कह दिया था कि चुनाव के बाद तय होगा कि  मुख्यमंत्री कौन बनेगा। स्वामी प्रसाद ने जून 2021 में मीडिया से बात करते हुए कहा, ”चुनाव के बाद मुख्यमंत्री का फैसला केंद्रीय समिति की ओर से लिया जाएगा।” इसके बाद ही अटकलें लगने लगी थीं कि योगी के चेहरे पर चुनाव लड़ने को लेकर बीजेपी में फूट है।

पीएम ने कंधे पर हाथ रख दिया था संदेश
यूपी बीजेपी में मतभेद की खबरें इस तरह सुर्खियों में आईं कि पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कई अवसरों पर संकेत देना पड़ा कि पार्टी योगी के साथ खड़ी है और चुनाव योगी के चेहरे पर ही लड़ा जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कंधे पर हाथ रखकर विमर्श करते पीएम मोदी की तस्वीरों ने पार्टी में योगी के विरोधियों को साफ संदेश दे दिया था कि या तो उन्हें योगी के नेतृत्व को स्वीकार करना होगा या उनके लिए दरवाजे खुले हैं।

स्वामी के समर्थकों का कट सकता था टिकट: सूत्र
बीजेपी सूत्रों का कहना है कि जिस तरह स्वामी प्रसाद मौर्य ने योगी के खिलाफ मोर्चा खोला था उससे यह तय हो गया था कि स्वामी प्रसाद मौर्य और उनके समर्थकों को किनारे लगाया जा सकता है। मौर्य के बाद बीजेपी छोड़ने वाले विधायक रोशन लाल वर्मा ने पिछले दिनों अपनी सरकार की आलोचना की थी। पिछले साल अक्टूबर में कानपुर में एक दलित की हत्या के बाद बिल्हौर से विधायक भगवती सागर ने पुलिस पर आरोप लगाकर अपनी सरकार को असहज किया था। कानपुर के कुख्यात विकास दुबे ने भी कथित तौर पर एसटीएफ की पूछताछ के दौरान उनका नाम लिया था।

योगी सरकार में मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने क्यों BJP को दिया झटका? खुद बताईं वजहें

/किशन श्रीवास्तव दैनिक समय जगत लखनऊ / उत्तर प्रदेश में चुनाव से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को बड़ा झटका लगा है। योगी सरकार में मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने के बाद समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया है। बताया जा रहा है कि मौर्य काफी समय से असंतुष्ट चल रहे थे। अब चुनाव से ठीक पहले उन्होंने पाला बदलते हुए एक लेटर जारी किया और इस्तीफे की वजहों का जिक्र किया है।

ओबीसी वोटरों के बीच अच्छी पकड़ रखने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य कभी मायावती के बेहद करीबी थे। मौर्य ने एक बार फिर अपना ठिकाना बदलते हुए ट्विटर पर लिखा कि दलितों, पिछड़ों, किसानों, बेरोजगार नौजवानों और छोटे-लघु व मध्यम श्रेणी के व्यापारियों की घोर अपेक्षा की वजह से उन्होंने इस्तीफा दिया है। मौर्य योगी सरकार में श्रम, सेवायोजन एवं समन्वय मंत्री थे।

विपरीत विचारधारा में किया काम: मौर्य
स्वामी प्रसाद मौर्य ने लेटर में इस्तीफे की वजह बताते हुए यह भी कहा कि वह विपरीत परिस्थिति और विचारधारा में काम कर रहे थे। उन्होंने लिखा, ”विपरीत परिस्थितितियों और विचारधारा में रहकर भी बहुत ही मनोयोग के साथ उत्तरदायित्व का निर्वहन किया। लेकिन दलितों, पिछड़ों, किसानों, बेरोजगार नौजवानों और छोटे-लघु एवं मध्यम श्रेणी के व्यापारियों की घोर उपेक्षात्मक रवैये के कारण उत्तर प्रदेश के मंत्रिमंडल से इस्तीफा देता हूं।”

मायावती को भी चुनाव से ठीक पहले दिया था झटका
स्वामी प्रसाद मौर्य ने 2017 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मायावती को झटका देते हुए बीजेपी का दामन थाम लिया था। अगस्त 2016 में बीजेपी की सदस्यता लेते हुए उन्होंने बसपा सुप्रीमो पर टिकट बेचने के आरोप लगाए थे।

हवाई चप्पल-सादे कपड़े और स्कूटर.. अरबपति कारोबारी पीयूष जैन की आम जिंदगी

: अरबों की संपत्ति का मालिक कितनी आम जिंदगी जी रहा था. पड़ोसियों से मिली जानकारी के अनुसार पीयूष जैन के दादा का नाम फूल चंद जैन था. उनका कपड़े की छपाई वगैरा का कारोबार था.

कन्नौज,अपने कारोबार के बल पर धनकुबेर बन जाने वाला इत्र कारोबारी पीयूष जैन बेहद साधारण जीवन जीता था. उसके पड़ोसियों का कहना है कि वह बहुत ही साधारण तरीके से रहते थे. अभी भी वो स्कूटर चलाते हैं. साधारण कपड़ों के साथ हवाई चप्पल पहनकर फंक्शन में जाना उनके लिए आम बात है. उनका सीधा मकसद था ‘ना किसी से दोस्ती थी ना किसी से दुश्मनी.’

पड़ोसियों ने किया खुलासा
कन्नौज में हमारी टीम ने पीयूष जैन के घर के आसपास रहने वाले उनके पड़ोसियों से बातचीत की तो ये हैरान करने वाला खुलासा हुआ. अरबों की संपत्ति का मालिक कितनी आम जिंदगी जी रहा था. पड़ोसियों से मिली जानकारी के अनुसार पीयूष जैन के दादा का नाम फूल चंद जैन था. उनका कपड़े की छपाई वगैरा का कारोबार था.

पिता करते थे कपड़े पर छपाई का काम
पीयूष जैन के दादा और पिता महेश चंद्र जैन पहले कपड़े पर छपाई का काम करते थे. पीयूष ने काम की शुरुआत मुंबई की किसी कंपनी में सेल्समैन के तौर पर की थी. लेकिन केमिस्ट्री के अच्छे जानकार होने के नाते उन्होंने साबुन और डिटर्जेंट आदि के कंपाउंड बनाने का काम शुरू कर दिया था. बाद में वो गुटखा और पान मसाला से कारोबार में आ गए.

पीयूष का भाई है अंबरीष जैन
पड़ोसियों के मुताबिक पीयूष जैन और अंबरीश जैन दो भाई हैं. दोनों ने कानपुर यूनिवर्सिटी से केमिस्ट्री में एमएससी किया है. अंबरीष के तीन बच्चे हैं. पीयूष जैन के भी तीन बच्चे हैं. जिनमें एक लड़की है, जिसकी शादी हो चुकी है और वो पायलट रही है. दो बेटे हैं.

पीयूष ने कारोबार को बढ़ाया
बड़े होने पर पीयूष ने अपने पिताजी के कारोबार को आगे बढ़ाया और साबुन और डिटर्जेंट के कंपाउंड के कारोबार से आगे बढ़कर गुटखा और तंबाकू का कंपाउंड बनाना शुरू किया. फिर बड़ी कंपनियों को सेल करना शुरू किया और इसी तरह से वो धीरे-धीरे धन कुबेर बन गए. पीयूष जैन कन्नौज से कानपुर आकर व्यापार की वजह से ही बसे थे.

अरबों की दौलत का खुलासा
बताते चलें कि कारोबारी पीयूष जैन की दौलत के बारे में जानकर हर कोई हैरान है. किसी ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि एक मामूली से दिखने वाले कारोबारी ने अरबों की दौलत जमा कर रखी थी. छापे के दौरान पीयूष जैन के कब्जे से 200 करोड़ कैश, 23 किलो सोना और 6 करोड़ की कीमत का चंदन तेल बरामद किया गया है.

इसके अलावा एक तहखाने का भी खुलासा हुआ है. छापेमारी के दौरान डीजीजीआई (DGGI) की टीम को 500 चाबियां, 109 ताले और 18 लॉकर मिले हैं. कुल मिलाकर अंदाजा लगाया जाए तो पीयूष की ये सारी दौलत करीब 1000 करोड़ की है.

अखिलेश ने पूछा- इत्र व्यापारी के पास पैसा कहां से आया, मोदी-शाह का जवाब- आपका ही पैसा है…

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हरदोई में एक जनसभा के दौरान पलटवार किया है. उन्होंने कहा, आज उन्हें जवाब देते नहीं बन रहा क्योंकि ये पैसा समाजवादी पार्टी के इत्र बनाने वाले के यहां से निकला है. पीएम मोदी ने भी छापे पर तंज किया है.

कानपुर में इत्र कारोबारी पीयूष जैन के ठिकानों से 200 करोड़ रुपये से ज्यादा कैश बरामद होने के बाद यूपी चुनाव से ठीक पहले राजनीति गरमा गयी है. भारी मात्रा में कैश बरामद होने के बाद अखिलेश यादव ने सरकार से सवाल पूछा था कि बरामद हुआ पैसा किसका है. सवाल पूछने पर पहले तो गृह मंत्री अमित शाह और अब कानपुर में खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका जवाब दिया है.

बीजेपी के दोनों शीर्ष नेताओं ने कहा कि यह पैसा समाजवादी पार्टी का ही है. इससे पहले सीएम योगी भी बरामद हुए पैसों को पिछली सरकार के कार्यकाल में हुए भ्रष्टाचार का बदबू बता चुके हैं.

PM मोदी बोले- नोटों का पहाड़ सबने देखा

दरअसल अखिलेश यादव ने पूछा था कि छापेमारी में बरामद 194 करोड़ रुपये आखिर किसका है, सरकार को इस पर जवाब देना चाहिए. इसी का जवाब देते हुए पीएम मोदी ने कानपुर की रैली में कहा, बीते दिनों जो बक्से भर-भरकर नोट मिला है, ये लोग उसमें भी कहेंगे कि यह भी बीजेपी ने किया है.

उन्होंने कहा, ‘पिछली सरकार ने भ्रष्टाचार का जो इत्र छिड़क रखा था, वह सबके सामने आ गया है. लेकिन अब वो मुंह पर ताला लगाकर बैठे हैं और इसका क्रेडिट नहीं ले रहे. पीएम ने कहा कि नोटों का जो पहाड़ सबने देखा, यही उनकी (सपा) उपलब्धि है.’

पकड़ा गया पैसा समाजवादी पार्टी का: अमित शाह

सरकार से अखिलेश के जवाब मांगने पर गृह मंत्री अमित शाह ने भी हरदोई में एक जनसभा के दौरान पलटवार किया है. उन्होंने कहा, आज उन्हें जवाब देते नहीं बन रहा क्योंकि ये पैसा समाजवादी पार्टी के इत्र बनाने वाले के यहां से निकला है.

अमित शाह ने कहा, ‘अखिलेश जी हमें डराने की कोशिश न करो, हमने कालेधन को सामाप्त करने की बात की. आज रेड हो रही है तो उन्हें बेचैनी हो रही है, समाजवादी इत्र बनाने वाले के यहां से ढाई सौ करोड़ रुपये निकले हैं.

अखिलेश ने पूछा था… किसका है पैसा

बता दें कि अखिलेश यादव ने एक कार्यक्रम के दौरान राज्य में लगातार हो रही छापेमारी को लेकर निशाना साधते हुए पूछा था कि कानपुर में बरामद 194 करोड़ रुपये किसका है? सरकार को जवाब देना चाहिए, नोटबंदी पूरी तरह विफल रहा है.

इससे पहले इत्र कारोबारी के घर से बरामद पैसे को लेकर राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर निशाना साधा था.

सीएम योगी बरामद पैसों को बता चुके हैं भ्रष्टाचार का बदबू

कानपुर के इत्र कारोबारी पीयूष जैन के घर मिली करोड़ों की नकदी का जिक्र करते हुए योगी ने कहा था, ‘सपा से जुड़ा एक शख्स ‘समाजवादी इत्र’ की बात करता था, जिस पर हमारे प्रदेश अध्यक्ष ने कहा है कि ये कोई परफ्यूम नहीं, बल्कि ‘समाजवादी बदबू’ है. आज उनकी दीवारों और घरों से 257 करोड़ रुपये और कई किलो सोना-चांदी मिला है. यह पैसा गरीबों का है, जिसे सरकार के संरक्षण में लूटा गया. “यह ‘समाजवादी इत्र’ नहीं, ‘समाजवादी बदबू’ है, जो प्रदेश में फैलाई जा रही है”.

अब अखिलेश यादव ने भी इन आरोपों पर पलटवार किया है. उन्होंने सीएम को झूठा बताते हुए कहा है कि आज ये साबित हो चुका है कि नोटबंदी पूरी तरह फेल थी. उनके मुताबिक आखिर इतना सारा पैसा आया कहा से, हवाई मार्ग से, ट्रेन से या फिर सड़क के रास्ते.

मेडिकल कॉलेज में फूटा कोरोना बम! दोनों डोज लगवा चुके MBBS के 31 स्टूडेंट्स मिले संक्रमित

मेडिकल कॉलेज में करीब 60 स्टूडेंट्स के सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे जिनमें से अब तक 31 के संक्रमित होने की पुष्टि हुई है. गौर करने वाली बात ये है कि संक्रमित हुए सभी छात्र कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज ले चुके थे.

नई दिल्ली: देश में कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन का खतरा बढ़ता जा रहा है. इस बीच कोरोना के मामलों में उछाल देखने को मिल रही है. अब महाराष्ट्र के सांगली जिले में कोरोना विस्फोट हुआ है, जहां एक साथ MBBS के 31 स्टूडेंट्स कोरोना संक्रमित पाए गए हैं. सभी छात्र सांगली के एक सरकारी मेडिकल कॉलेज के हैं.

दोनों डोज ले चुके थे सभी संक्रमित

कॉलेज में करीब 60 स्टूडेंट्स के सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे जिनमें से अब तक 31 के संक्रमित होने की पुष्टि हुई है. गौर करने वाली बात ये है कि संक्रमित हुए सभी छात्र कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज ले चुके थे. महाराष्ट्र में कोरोना के अलावा ओमिक्रॉन भी तेजी से फैल रहा है और वहां रोज नए मामले रिपोर्ट हो रहे हैं.

कॉलेज के डीन डॉ सुधीर नानंदकर ने कहा, ‘सभी स्टूडेट्स में लक्षण नहीं हैं और उनकी हालत स्थिर है. एहतियात के तौर पर उन्हें कॉलेज से जुड़े अस्पताल में भर्ती किया गया है.’ उन्होंने कहा कि हॉस्टल के एक हिस्से में संक्रमण के मामले सामने आए हैं क्योंकि छात्र भोजन करने के लिए मेस में जमा होते हैं.

ओमिक्रॉन के सबसे ज्यादा केस 

देश में अब तक महाराष्ट्र ओमिक्रॉन से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य है. यहां मंगलवार तक ओमिक्रॉन के 167 मामले सामने आ चुके हैं. इसके बाद राजधानी दिल्ली में 165, केरल में 57, तेलंगाना में 55, गुजरात में 49 और राजस्थान में 46 मामले सामने आए हैं.

इसके अलावा सोमवार को राज्य में कोरोना वायरस के 1,426 नए मामले आए थे और 21 मरीजों की मौत हुई थी. नये मरीजों में 26 लोग वायरस के नये वेरिएंट ओमिक्रॉन से संक्रमित पाए गए थे.

दिल्ली: बंद होंगे स्कूल, सिनेमा, ऑड-ईवन के आधार पर खुलेंगी दुकानें! CM की बैठक आज

: सीएम केजरीवाल हाई लेवल मीटिंग में दिल्ली में येलो अलर्ट लागू करने पर चर्चा कर सकते हैं. बीते दो दिन से दिल्ली में पॉजिटिविटी रेट 0.5 फीसदी से ज्यादा है.

नई दिल्ली: कोरोना वायरस (Coronavirus) के बढ़ते मामलों के बीच और नए वैरिएंट Omicron के खतरे को देखते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) आज (मंगलवार को) हाई लेवल समीक्षा बैठक करेंगे. दोपहर 12 बजे दिल्ली सचिवालय में अहम बैठक होगी. इस मीटिंग में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) लागू करने पर विचार हो सकता है.

क्या है ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान?

अगर दिल्ली में GRAP लागू होता है तो स्कूल, सिनेमा और जिम बंद हो सकते हैं. शॉपिंग कॉम्पलेक्स और मॉल में दुकानें ऑड-ईवन के आधार पर खुलेंगी. दिल्ली सरकार ने देशभर में कोरोना की दूसरी लहर के बाद, जुलाई 2021 में कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) को पास किया था. GRAP के तहत दिल्ली में कब लॉकडाउन लगेगा, कब क्या बंद रहेगा और कब क्या खुलेगा ये बताया था. GRAP के तहत 4 लेवल पर अलर्ट तैयार किए गए थे.

दिल्ली में लागू हो सकता है येलो अलर्ट

दिल्ली में बीते रविवार को कोरोना के मामले 290 और 0.55 फीसदी कोरोना की संक्रमण दर रही थी. वहीं सोमवार को दिल्ली में कोरोना के 331 नए मामले सामने आए और संक्रमण दर 0.68 प्रतिशत पहुंची गई. GRAP के अलर्ट के मुताबिक, अगर लगातार 2 दिन तक पॉजिटिविटी रेट 0.5 फीसदी दर्ज होता है तो दिल्ली में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान के तहत लेवल-1 यानी येलो अलर्ट लागू हो जाएगा. संक्रमण दर 1 प्रतिशत से अधिक होने पर लेवल-2 यानी अंबर अलर्ट, 2 प्रतिशत से अधिक होने पर लेवल-3 यानी ऑरेंज अलर्ट और 5 प्रतिशत से अधिक होने पर लेवल-4 यानी रेड अलर्ट जारी किया जाएगा.

जान लें कि लेवल-1 यानी येलो अलर्ट तब जारी किया जाता है, जब लगातार दो दिनों तक पॉजिटिविटी रेट 0.5 प्रतिशत को पार करता है. एक सप्ताह में 1,500 नए मामले दर्ज होते हैं और 500 मरीजों को ऑक्सीजन बेड की जरूरत होती है.

येलो अलर्ट लागू होने के बाद क्या खुलेगा, क्या बंद रहेगा?

– दिल्ली में येलो अलर्ट लागू होने के बाद कंस्ट्रक्शन एक्टिविटीज जारी रहेंगी.

– दिल्ली सरकार के ऑफिसों में ए ग्रेड ऑफिसर्स के 100 फीसदी स्टाफ को आना होगा, बाकी 50 फीसदी स्टाफ बुलाया जाएगा.

– प्राइवेट ऑफिसों में 50 फीसदी स्टाफ आएगा. दुकानें ऑड-ईवन के आधार पर सुबह 10 से रात 8 बजे तक खुलेंगी.

– ऑड-ईवन बेस पर मॉल सुबह 10 से रात आठ बजे तक खुलेंगे.

– हर जोन में 50 प्रतिशत वेंडर के साथ एक वीकली मार्केट ही चलेगी. रेस्टोरेंट और बार 50 फीसदी क्षमता के साथ चलेंगे.

– पब्लिक पार्क खुलेंगे. होटल खुलेंगे. बार्बर शॉप खुलेंगी.

– सिनेमाघर, थिएटर, बैंक्वेट हॉल, जिम और एंटरटेनमेंट पार्क बंद रहेंगे.

– दिल्ली मेट्रो और बसों में सिटिंग कैपिसिटी के हिसाब से 50 फीसदी लोग सफर करेंगे लेकिन स्टैंडिंग की इजाजत नहीं होगी.

– नाइट कर्फ्यू रात दस से सुबह 5 तक रहेगा.

– स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और स्वीमिंग पूल बंद रहेंगे.

– ऑटो, ई-रिक्शा में दो सवारी, टैक्सी-कैब, ग्रामीण सेवा, फटफट सेवा में दो सवारी, मैक्सी कैब में 5 सवारी, आरटीवी में 11 सवारी बैठेंगी.

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