उत्‍तर प्रदेश के बहराइच से सांसद हैं सावित्रीबाई फुले. उन्‍होंने बीजेपी पर ही निशाना साधते हुए कहा कि बीजेपी समाज में बंटवारे की कोशिश कर रही है.

नई दिल्‍ली : उत्‍तर प्रदेश के बहराइच से बीजेपी सांसद सावित्री बाई फुले ने गुरुवार को बीजेपी से इस्‍तीफा दे दिया है. फुले ने इस्‍तीफा देने के बाद कहा कि दलितों को श्रीराम मंदिर नहीं, संविधान चाहिए. हनुमान जी दलित थे तभी भगवान श्रीराम ने उन्‍हें बंदर बनाया. उन्‍होंने कहा कि दलित सांसद होने के कारण मेरी बातों को और मुझे अनसुना किया गया है. आज में बीजेपी से इस्तीफा दे रही हूं. उन्‍होंने बीजेपी पर ही निशाना साधते हुए कहा कि बीजेपी समाज में बंटवारे की कोशिश कर रही है.

सावित्री बाई फुले ने कहा कि संविधान को समाप्त करने की साजिश की जा रही है. दलित और पिछड़ा का आरक्षण बड़ी बारीकी से समाप्त किया जा रहा है. जब तक मैं जिंदा रहूंगी घर वापस नहीं जाऊंगी. संविधान को पूरी तरह से लागू करूंगी. 23 दिसम्बर को लखनऊ के रमाबाई मैदान में महारैली करने जा रही हूं. उसमें मैं बड़ा धमाका करूंगी.

उन्‍होंने आगे कहा ‘मैं सांसद हूं, जब तक कार्यकाल है सांसद रहूंगी. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने कहा कि हनुमान जी दलित थे. हनुमान दलित थे लेकिन मनुवादियों के खिलाफ थे. हनुमान जी दलित थे तभी राम ने उन्हें बंदर बना दिया. दलितों को मंदिर नही संविधान चाहिए.

बहराइच से भाजपा सांसद सावित्री बाई फूले ने पिछले दिनों कहा था ‘‘हनुमान दलित थे और मनुवादियों के गुलाम थे. अगर लोग कहते है कि भगवान राम है और उनका बेड़ा पार कराने का काम हनुमान जी ने किया था. उनमें अगर शक्ति थी तो जिन लोगों ने उनका बेड़ा पार कराने का काम किया, उन्हें बंदर क्यों बना दिया? उनको तो इंसान बनाना चाहिये था लेकिन इंसान ना बनाकर उन्हें बंदर बना दिया गया. उनको पूंछ लगा दी गई, उनके मुंह पर कालिख पोत दी गई. चूंकि वह दलित थे इसलिये उस समय भी उनका अपमान किया गया.’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम तो यह देखते है कि अब देश तो ना भगवान के नाम पर चलेगा और नाहीं मंदिर के नाम पर. अब देश चलेगा तो भारतीय संविधान के नाम पर. हमारे देश का संविधान धर्मनिरपेक्ष है. उसमें सभी धर्मो की सुरक्षा की गारंटी है. सबको बराबर सम्मान व अधिकार है. किसी को ठेस पहुंचाने का अधिकार भी किसी को नहीं है. इसीलिये जो भी जिम्मेदार लोग बात करें भारत के संविधान के तहत करें, गैर जिम्मेदाराना बात करने से जनता को एक बार सोचने पर मजबूर करता है.’