साल 2005 में हुई एलओसी पर फेंसिंग (LOC Fencing) के बाद से इस इलाके में आतंकी घुसपैठ की कोशिशें न के बराबर ही रही हैं. इस इलाके में मौजूद भारतीय सेना (Indian Army) की पोस्ट से आतंकियों की हर हलचल आसानी से मॉनिटर की जा सकती है.

नई दिल्ली. कश्मीर में पाकिस्तान से घुसपैठ (Infiltration) कर रहे 3 आतंकियों को सेना ने मार (3 Terrorists Killed) गिराया. घटना रामपुर सेक्टर के रुस्तम बटालियन एरिया के हथलंगा जंगल के करीब की है. आतंकियों के पास से भारी संख्या में हथियार भी बरामद किए गए हैं. वैसे तो इस तरह के ऑपरेशन एलओसी पर होना आम बात है, लेकिन इन आतंकियों के घुसपैठ की कोशिश सेना के बीच चिंता की वजह इसलिए है क्योंकि रुस्तम बटालियन के हथलंगा इलाके में करीब 15 साल बाद घुसपैठ की कोशिश की घटना सामने आई है.

सूत्रों के मुताबिक साल 2005 में हुई एलओसी पर फेंसिंग के बाद से इस इलाके में आतंकी घुसपैठ की कोशिशें न के बराबर ही रही हैं. इस इलाके में मौजूद भारतीय सेना की पोस्ट से आतंकियों की हर हलचल आसानी से मॉनिटर की जा सकती है.

सवाल यह है कि तकरीबन डेढ़ दशक बाद इस जगह को आतंकियों ने घुसपैठ के लिए क्यों चुना? जानकारों के मुताबिक पाकिस्तान में आतंकी घुसपैठ को अंजाम देने वाले लोगों को लगता है कि भारत उन जगहों पर सतर्क नहीं होगा जहां लंबे समय से इस तरह की किसी घटना को अंजाम नहीं दिया गया है.

इंटेलिजेंस इनपुट में भी इस बात का खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान पुराने घुसपैठ रूट को फिर से एक्टिव करने के लिए पीओके के स्थानीय लोगों और गाइड के साथ लगातार बैठकें कर रहा था. इन बैठकों में पुराने रूट एक्टिव करने और नए रूट तलाशने पर जोर दिया जा रहा था. बैठकों का मुख्य मुद्दा यही था कि भारतीय सेना की नजरों से बचकर कैसे आतंकियों को कश्मीर के रिसेप्शन एरिया तक पहुंचाया जाए.

पिछले सालों घुसपैठ के आंकड़े
अगर हम पिछले कुछ साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2018 में कुल 66 कोशिशें एलओसी पर आतंकी घुसपैठ की दर्ज हुईं. इसमें 328 आतंकी घुसपैठ करने की फिराक में थे, 32 को तो सेना ने ढेर कर दिया. तकरीबन 150 आतंकी वापस भाग गए और 140 के करीब घुसपैठ करने में कामयाब हुए. ऐसे ही साल 2019 में देखा गया. कुल 40 के करीब घुसपैठ की कोशिशें सेना ने दर्ज की.

219 आतंकियों ने घुसने की कोशिश की जिसमें 4 को सेना ने मार गिराया जबकि 75 के करीब वापस भाग गए और 141 आतंकी सीमा पार से घुसपैठ करने में कामयाब रहे. कोरोना के चलते पाकिस्तान की तरफ से कोशिशें हुईं लेकिन जितनी पहले होती थी उसमें कमी जरूर देखी गई. कुल 9 कोशिशें दर्ज हुईं. इन कोशिशों में शामिल19 आतंकियों को मारा गिराया गया जबकि 30 के करीब वापस भाग गए और 50 घाटी में एलओसी के अलग-अलग जगह से घुस पाने में कामयाब रहे.

इस साल अब तक आधा दर्जन कोशिशे देखी गईं हैं इसमें से 4 आतंकियों को एलओसी पर ही ढेर कर दिया गया. गुरुवार को रामपुर सेक्टर के रुस्तम बटालियन एरिया में हथलंगा जंगल ऑपरेशन के बाद सेना के 15वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल पांडे ने बताया कि आतंकी जिस तरह घुसपैठ की कोशिश कर रहे हैं ऐसा पाकिस्तान के लोकल मिलिट्री कमांडर की मिलीभगत के बगैर मुमकिन नहीं है.

कमांडर ने कहा, पाकिस्तान के इरादे अब भी नापाक
कोर कमांडर ने ये साफ कर दिया है कि जो पाक सेना अपने को दुनिया के सामने पाक साफ होने का ढोंग करती है उसकी असली हकीकत ये ही है. लेकिन सीमा पार से जो भी लोग घुसपैठ कर पाने में कामयाब भी हुए उन्हें भी सुरक्षाबलों ने घाटी में अलग-अलग मुठभेड़ों में मार गिराया. आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2018 में 215, 2019 में 153, 2020 में 220 और इस साल 2021 में 31 अगस्त तक 110 से ज़्यादा आतंकियों को सुरक्षाबलों ने ढेर कर दिया. अफगानिस्तान पर तालिबान के काबिज होने के बाद से घुसपैठ का खतरा और भी बढ़ गया.

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