24 सितंबर को होने वाले सम्मेलन की घोषणा इस साल मार्च में की गई थी जब पहली बार Quad सम्मेलन हुआ था. इस दौरान चारों देशों के नेता ठोस प्रस्तावों के साथ सामने आए थे.


वॉशिंगटन.
 अफगानिस्तान (Afghanistan) में सैनिकों की वापसी के बाद सवालों से घिरे अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन (Joe Biden) एक बार फिर दुनिया का ध्यान चीन की ओर लाना चा रहे हैं. अमेरिका में कोविड के बढ़े मामलों से भी बाइडन की छवि को नुकसान हुआ है. अधिकतर मामले ऐसे हैं जिसमें लोगों को अस्पताल में भर्ती होना पड़ रहा है. एक ओर जहां अमेरिका में वैक्सीनेशन के लिए योग्य आबादी के बड़े हिस्से का टीकाकरण हो चुका है उसके बाद भी कोरोना के मामलों का लगातार बढ़ना चिंता का कारण बनता जा रहा है. बढ़ते कोविड के मामलों के बाद भी अमेरिका ने Quad देशों के राष्ट्राध्यक्षों की बैठक बुलाई है. इसमें ऑस्ट्रेलिया, भारत और जापान के प्रधानमंत्री भी शामिल होंगे.

24 सितंबर को होने वाले सम्मेलन की घोषणा इस साल मार्च में की गई थी जब पहली बार Quad सम्मेलन हुआ था. इस दौरान चारों देशों के नेता ठोस प्रस्तावों के साथ सामने आए थे. इंडो-पैसिफिक रीजन के चार महत्वपूर्ण नेताओं- राष्ट्रपति बिडेन, पीएम नरेंद्र मोदी, पीएम योशीहिदे सुगा और पीएम स्कॉट मॉरिसन की मुलाकात के दौरान अमेरिका की कोशिश होगी कि दुनिया का ध्यान अफगानिस्तान से हटकर चीन की ओर जाए.

पीएम मोदी की रवानगी से पहले क्या बोला भारत?
पीएम मोदी अमेरिका रवानगी से पहले विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने कहा, ‘राष्ट्रपति बाइडन की यह पहली बहुपक्षीय भागीदारी है. यह इस बात का संकेत है कि बाइडन प्रशासन के लिए क्वाड प्राथमिकता की सूची में है.  क्वाड समान विचारधारा वाले चार देशों के बीच एक साझेदारी है जो खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए काम कर रहे हैं.’

क्वाड समिट से पहले, भारत और ऑस्ट्रेलिया के ने 2+2 बैठक आयोजित की जिसमें दोनों देशों के रक्षा और विदेश मंत्री ने अलग-अलग बात की. दोनों पक्षों ने स्वतंत्र, खुले, समावेशी और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की जरूरत को दोहराते हुए चीन पj ध्यान केंद्रित किया. हालांकि दोनों देशों का यह भी कहना है कि क्वाड का उद्देश्य चीन के खिलाफ जाना नहीं है. साल 2018 में शांगरी ला डायलॉग में पीएम मोदी ने कहा था, ‘भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को एक रणनीति या सीमित सदस्यों के क्लब के तौर पर नहीं मानता.  न ही ऐसे समूह के रूप में जो हावी होना चाहता है. और हम इसे किसी भी तरह से किसी देश के खिलाफ नहीं मानते हैं.’ पीएम का यह बयान, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के उस बयान के बाद आया था जिसमें कहा गया था कि यह (क्वाड) किसी तीसरे पक्ष को निशाना ना बनाए.’

ऑस्ट्रेलिया ने भी स्पष्ट की स्थिति
ऑस्ट्रेलिया ने भी हाल ही में चीन को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है. विदेश मंत्री मारिस पायने ने कहा कि क्वाड चीन के खिलाफ नहीं है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी शक्ति हिंद-प्रशांत में शर्त नहीं कर सकती.

बीते दिनों ब्रिटेन, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया ने हिंद प्रशांत में चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस क्षेत्र के लिए एक नए त्रिपक्षीय सुरक्षा गठबंधन ‘ऑकस’ (एयूकेयूएस) की घोषणा की है, ताकि वे अपने साझा हितों की रक्षा कर सकें और परमाणु ऊर्जा से संचालित पनडुब्बियां हासिल करने में ऑस्ट्रेलिया की मदद करने समेत रक्षा क्षमताओं को बेहतर तरीके से साझा कर सकें. ऑकस बनने के बाद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा ‘हम उन कृत्यों का विरोध करते हैं जो अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को कमजोर करते हुए, टकराव और विभाजन पैदा कर रहे हैं.

जब ब्रिटेन के पूर्व विदेश सचिव डॉमिनिक रैब ने दिसंबर 2020 में भारत की यात्रा की, तो उन्होंने ब्रिटेन के इंडो-पैसिफिक झुकाव पर बात की थी. अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार क्वाड  कोविड, जलवायु, आर्थिक निवेश और प्रौद्योगिकी पर ध्यान केंद्रित करेगा. 

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