ममता दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) से लेकर डीएमके सांसद कनिमोझी तक को अपने विश्वास में ले रही हैं. उन्होंने लालू प्रसाद यादव से भी बात की है और जल्द ही राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार के साथ मुलाकात करेंगी.

नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल (West Bengal) की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राज्य में तीन दशक की सबसे बड़ी जीत दर्ज करने के बाद पहली बार दिल्ली पहुंची थीं. इस बार उनकी मुलाकात की फेहरिस्त में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) से लेकर मुख्य विपक्षी पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) का नाम भी शामिल था. हालांकि, इस दौरान उनके दो रूप देखने को मिले. पहला, एक विपक्षी नेता, जो भारतीय जनता पार्टी (BJP) को चुनौती देने की हिम्मत रखता है. दूसरा, बंगाल की सीएम, जो संघीय ढांचे का पालन कर राज्य की मांग को केंद्र तक लेकर गई थीं. सीएम बनर्जी के इस पूरे दौरे को ऐसे समझते हैं-

कांग्रेस से पहली मुलाकात
दिल्ली पहुंचने के बाद तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ एक के बाद एक बैठकें की. इनमें कमलनाथ, अभिषेक मनु सिंघवी का नाम शामिल है. अंत उन्होंने सोनिया और राहुल गांधी के साथ ‘चाय पे चर्चा’ की. वो जानती हैं कि 2024 की जंग के लिए कांग्रेस की मौजूदगी जरूरी है. ऐसे में समझ के लिहाज से सबसे पुरानी पार्टी को साथ लाना अहम है. सीएम बनर्जी ने हालात को देखते हुए कदम उठाया.

क्षेत्रीय दिग्गजों को साथ लाने की कवायद!
ममता दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से लेकर डीएमके सांसद कनिमोझी तक को अपने विश्वास में ले रही हैं. उन्होंने लालू प्रसाद यादव से भी बात की है और जल्द ही राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार के साथ मुलाकात करेंगी. उन्होंने घोषणा की है, ‘क्षेत्रीय दिग्गज ताकतवर हैं और सभी साथ आएंगे. यह जंग मोदी और भारत के बीच होगी.’

बीजेपी के साथ भी हुई चर्चा
ममता एक मुख्यमंत्री हैं और उनके राज्य की मांग उनकी प्राथमिकताएं हैं. इसके चलते राजनीतिक लड़ाई के बावजूद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और अपनी मांगें रखीं. वो केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से भी मिलीं और कोलकाता में फ्लाईओवर से लेकर निर्माण इकाई तक बंगाल के लिए कई मांगें रखीं. इस मुलाकात के जरिए ममता ने यह दिखाया है कि वो संघीय ढांचे की मर्यादा बनाए रखेंगी और अपनी क्षमता में रहकर मांग सामने रखेंगी.

बीजेपी विरोधियों के साथ बैठक
बीजेपी के विरोधी माने जाने वाले जावेद अख्तर और शबाना आजमी ने सीएम बनर्जी के साथ मुलाकात की. अख्तर यह साफ कर चुके हैं कि 2024 में ‘परिवर्तन’ की जरूरत है. इससे एक बात साफ हो गई है कि ममता बीजेपी विरोधी खेमे के साथ सक्रिय हैं. 2011 से पहले ममता बंगाल में वामपंथियों के विरोधियों के साथ संपर्क में थीं और उन्होंने 2011 में बड़ा ‘परिवर्तन’ किया था. प्रभाव डालने वालों और बुद्धिजीवियों ने 2011 में ममता की काफी मदद की. ऐसे में इस तरीके को राष्ट्रीय स्तर पर भी जरूर लागू करेंगी.

इस दौरान टीएमसी प्रमुख पत्रकारों से भी मिलीं और शांति से सभी सवालों के जवाब दिए. पीएम बनने की इच्छा को लेकर जब उनसे सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा, ‘कोई नेतृत्व कर सकता है. मैं अपनी बात नहीं थोपेंगी. 2024 में विपक्ष की तरफ से कोई भी प्रधानमंत्री चेहरा हो सकता है.’ ऐसा कहना भी उनके लचीलेपन को दिखाता है. टीएमसी को भी लगता है कि एक विपक्षी खेमा तैयार होगा. जबकि, बीजेपी का मानना है कि यह एक सपना है, जो कभी पूरा नहीं होगा.

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