UP Assembly Election 2022 में भाजपा (BJP) का चुनाव अभियान राज्य के किसानों को विपक्षी ताकतों द्वारा ‘गुमराह’ होने से बचाने की कोशिश करता हुआ नजर आएगा.

नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश (UP Assembly Election) में भाजपा (BJP) का चुनाव अभियान राज्य के किसानों को विपक्षी ताकतों द्वारा ‘गुमराह’  होने से बचाने की कोशिश करता हुआ नजर आएगा. भाजपा यह संदेश देने की कोशिश करेगी कि उसने किसानों के लिए सबसे ज्यादा काम किया. दिल्ली की सीमाओं पर किसान आंदोलन और पश्चिम यूपी में इसके फैलते प्रभाव से समाजवादी पार्टी-राष्ट्रीय लोक दल गठबंधन (SP-RLD) अपनी संभावनाएं तलाश रहा है. यूपी बीजेपी इकाई द्वारा गुरुवार को विरोध करने वाले किसानों के बारे में ट्वीट किए गए एक विवादास्पद कार्टून की सपा और रालोद दोनों ने आलोचना की थी. इस बीच  भाजपा किसानों के बीच एक बड़ी पहुंच की योजना बना रही है ताकि यह तय हो कि उनका समर्थन पार्टी के साथ है.

पिछले दिनों दिल्ली में भाजपा सांसदों के साथ बैठक में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बात पर जोर दिया है कि किसानों के बीच विपक्ष के ‘प्रचार’ का तथ्यों के साथ मुकाबला करने की जरूरत है. बैठक में सभी भाजपा सांसदों को एक बुकलेट दी गई. इसमें किसानों पर एक बड़ा हिस्सा है. बुकलेट में दावा किाय गया है कि यूपी में 78 लाख से अधिक किसानों को 2017 से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर उनकी उपज खरीदने के बाद 78,000 करोड़ रुपये मिले जो पिछली सरकारों की तुलना में बहुत अधिक है.

गांवों में बांटी जा रही है बुकलेट
यह बुकलेट बड़े पैमाने पर बांटी जा रही है. सरकार किसानों को यह भी बता रही है कि पिछले साढ़े चार साल में 45 लाख गन्ना किसानों का 1.4 लाख करोड़ रुपये बकाया वापस मिला जो कि पिछली किसी भी सरकार में सबसे ज्यादा है. इस बीच भाजपा के कुछ सांसदों ने पार्टी नेतृत्व से गन्ने का खरीद मूल्य बढ़ाने पर विचार करने को कहा है. भाजपा ने इस बात पर भी जोर दिया कि कि यूपी में लगभग 2.5 करोड़ किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत 32,500 करोड़ रुपये मिले हैं, जबकि 2,208 करोड़ रुपये पीएम फसल बीमा योजना के तहत 25 लाख से अधिक किसानों को दिए गए.

बुकलेट में यह भी कहा गया है कि 2017 के बाद से यूपी में 3.77 लाख हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र में वृद्धि हुई है, जिससे किसान उत्पादन में वृद्धि हुई है. विपक्ष भी राज्य में योगी सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने के लिए किसान आंदोलन पर के सहारे है. अखिलेश यादव और सतीश चंद्र मिश्रा सहित समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के दोनों सांसद संसद में किसान हित का मुद्दा उठा रहे हैं.

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