नवजोत सिंह सिद्धू. पंजाब कांग्रेस कमेटी के नए-नवेले अध्यक्ष. किसानों के लिए दिए अपने एक बयान को लेकर तीखी आलोचना का सामना कर रहे हैं. इस बयान में नवजोत सिंह सिद्धू ने किसानों को ‘प्यासा’ और खुद को ‘कुआं’ बताने की कोशिश की थी. नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों की अगुवाई करने वाले संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने इसे लेकर नवजोत सिंह सिद्धू को आड़े हाथ लिया है. किसान संगठन ने सिद्धू के बयान को ‘घमंड से भरा’ बताया है.

क्या बोला SKM?

दरअसल, शुक्रवार 23 जुलाई को सिद्धू ने प्रदर्शनकारी किसानों से मिलने की इच्छा जताई थी. हालांकि, अपनी इच्छा जताते हुए सिद्धू यह भी कह गए

“मैं किसान मोर्चा के लोगों और मेरे बुजुर्गों से कहता हूं कि प्यासे को कुएं के पास आना होता है. कुआं प्यासे के पास नहीं जाता. (लेकिन) आज मैं आपको (किसानों) को न्योता देता हूं. मैं आपसे मिलना चाहता हूं.”

सिद्धू के इसी बयान को लेकर विवाद हो गया. इंडिया टुडे से जुड़े मनजीत सहगल की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार 26 जुलाई को संयुक्त किसान मोर्चा ने सिद्धू के खिलाफ प्रदर्शन करने का फैसला किया. संगठन के नेता मनजीत सिंह राय ने कहा,

“सिद्धू का बयान घमंड से भरा हुआ है. उनको लगता है कि किसानों को उनके पास आना चाहिए. सिद्धू ने किसानों का अपमान किया है.”

SKM के नेताओं की तरफ से यह भी कहा गया कि 2022 विधानसभा चुनाव के परिणाम बताएंगे कि कौन असल में प्यासा है और कौन कुआं हैं. पंजाब में अगले साल की शुरgआत में विधानसभा चुनाव होने हैं.

विपक्षियों ने माफी की मांग

संयुक्त किसान मोर्चा के अलावा विपक्षी पार्टियों ने भी सिद्धू पर निशाना साधा है. शिरोमणि अकाली दल और आम आदमी पार्टी ने सिद्धू के बयान की निंदा करते हुए माफी की मांग की है.

शिरोमणि अकाली दल के महासचिव डॉक्टर दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि सिद्धू का बयान बताता है कि वो अपने वर्तमान पद के नशे में किस कदर चूर हैं. दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी के विधायक कुलतार सिंह संधावा ने कहा,

“जो किसानों को और उनकी कड़ी मेहनत की कीमत समझते हैं, वो उन्हें प्यासा नहीं कह सकते. अपने घमंड से बाहर आओ और किसानों से माफी मांगो.”

Kisan
किसान मोर्चा ने नवजोत सिंह सिद्धू को आड़े हाथ लिया.

दूसरी तरफ सिद्धू ने अपने बयान को लेकर सफाई भी पेश की है. उन्होंने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है. साथ ही साथ सिद्धू ने नंगे पैर जाकर किसान संगठनों से मिलने की बात कही. सिद्धू ने नए कृषि कानूनों पर कांग्रेस पार्टी के रुख को भी दोहराया. उन्होंने कहा,

“कांग्रेस पार्टी संयुक्त किसान मोर्चा और किसान सत्याग्रहियों के साथ मजबूती से खड़ी है. तीनों काले कानून जरूर रद्द होने चाहिए.”

इससे पहले 21 जुलाई लुधियान में किसानों ने सिद्धू के सामने प्रदर्शन किया था. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे एक संगठन के लोगों ने सिद्धू से मिलने की कोशिश की थी. वे नए कानूनों को लेकर सिद्धू से सवाल करना चाहते थे. वहीं, 23 जुलाई के विवादित बयान के बाद 24 जुलाई को रूपनगर में सिद्धू को किसानों ने काले झंडे दिखाए थे.

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