समय जगत/, पेगासस जासूसी मामले में नया मोड़ आया है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कथित जासूसी की जांच करने के लिए दो सदस्यीय पैनल के गठन की घोषणा कर दी है. इस पैनल में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज मदन बी लोकुर और कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस ज्योतिर्मय भट्टाचार्य शामिल हैं. पेगासस जासूसी मामले ऐसा करने वाला पश्चिम बंगाल पहला राज्य बन गया है.

इस पैनल के गठन की घोषणा करते हुए सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि शुरुआत में उन्हें लगा था कि केंद्र सरकार इस मामले में कदम उठाते हुए निष्पक्ष जांच करेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. ऐसे में राज्य सरकार को अपनी खुद की जांच कमेटी बनानी पड़ी.

पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से यह घोषणा तब हुई है, जब पेगासस स्पाईवेयर की संभावित टारगेट लिस्ट में ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर का नाम सामने आया है. प्रशांत किशोर ने पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान टीएमसी के लिए चुनावी रणनीति तैयार की थी.

‘राज्य की गोपनीय सूचनाओं को खतरा’

जांच पैनल के गठन को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार ने एक नोटिफिकेशन भी जारी किया है. इसमें कहा गया है कि साल 2017 से ही पेगासस स्पाईवेयर के जरिए पश्चिम बंगाल के प्रमुख लोगों के फोन को सर्विलांस पर रखा गया है, उनकी कॉल्स सुनी जा रही हैं. नोटिफिकेशन में कहा गया है कि यह जासूसी ना केवल निजता का हनन है, बल्कि इससे राज्य की गोपनीय सूचनाओं को भी खतरा है, जिससे कानून व्यवस्था बिगड़ सकती है.

इससे पहले ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की थी कि वो इस पूरे मामले का स्वत: संज्ञान ले. दूसरी तरफ, पेगासस स्पाईवेयर को लेकर बनर्जी ने एक बार फिर से केंद्र सरकार पर निशाना साधा. बनर्जी ने कहा कि उन्होंने अपने फोन के कैमरे पर टेप लगा लिया है क्योंकि वे हर चीज की टैपिंग कर रहे हैं. चाहे वो वीडियो हो या ऑडियो.

ममता बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने प्रशांत किशोर के साथ उनकी मीटिंग्स की जासूसी की. उन्होंने कहा,

“कुछ दिन पहले मैं, प्रशांत किशोर और कुछ अन्य लोगों के साथ मीटिंग में थी. उन्होंने (केंद्र सरकार) हमारी एक-एक बात पता कर ली. प्रशांत किशोर ने अपना फोन ऑडिट करने को दिया और उन्हें पता चला कि हमारी एक मीटिंग की जासूसी पेगासस सॉफ्टवेयर के जरिए हुई.”

ममता बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि इस तरह की जासूसी की वजह से वे दिल्ली और ओडिशा के मुख्यमंत्रियों से बात नहीं कर पा रही हैं. उन्होंने कहा

“स्पाईगिरी’ चालू है. मंत्रियों और जजों के फोन टैप किए जा रहे हैं. पेगासस ने चुनाव आयोग, न्यायपालिका, मंत्रियों और मीडिया को कब्जे में ले लिया है. केंद्र सरकार इस देश को लोकतांत्रिक नहीं, बल्कि सर्विलांस स्टेस बनाना चाहती है.”

बीजेपी का पलटवार

दूसरी तरफ बीजेपी की तरफ से ममता बनर्जी पर पलटवार किया गया है. पार्टी के आईटी प्रमुख अमित मालवीय ने ट्वीट करते हुए पेगासस प्रोजेक्ट को ‘बकवास’ बताया और ममता बनर्जी की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा,

“आखिर हम इस बात को लेकर क्यों आश्चर्यचकित हैं कि ममता बनर्जी ने बकवास पेगासस प्रोजेक्ट की जांच के लिए न्यायिक आयोग का गठन किया है. उनकी प्राथमिकताएं हमेशा से भटकी हुई हैं. काश उन्होंने पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा और बहुत सारे कोविड घोटालों की जांच के लिए ऐसी तत्परता दिखाई होती!”

पेगासस प्रोजेक्ट के तहत 300 वैरीफाइड फोन नंबर्स सामने आए हैं. इनमें से दो नंबर केंद्रीय मंत्रियों अश्विनी वैष्णव और प्रह्लाद पटेल के हैं. 40 भारतीय पत्रकारों के नाम भी पेगासस स्पाईवेयर के संभाविट टारगेट लिस्ट में शामिल हैं. तीन विपक्षी नेताओं, जिनमें कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और सांसद राहुल गांधी भी शामिल हैं, के नंबर भी इस लिस्ट में हैं. इसके अलावा कई सारे उद्योगपतियों और राजनीतिक-सामाजिक कार्यकर्ताओं के नंबर भी इस लिस्ट में शामिल हैं. भारत के अलावा दूसरे देशों के पत्रकारों और नेताओं के नंबर भी इस लिस्ट में पाए गए हैं. इनमें से एक प्रमुख नाम फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का है.

इस खुलासे के बाद विपक्ष ने संसद में इस पूरे मामले को उठाया. राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर जासूसी के आरोप लगाए. दूसरी तरफ सरकार ने लगातार इन आरोपों को खारिज किया. उसकी तरफ से कहा गया कि देश में अवैध जासूसी संभव नहीं है और इस तरह के आरोपों से भारत और यहां के लोकतंत्र को बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है.

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