डीएमके को लगता है कि जनता उसके साथ है और अगले विधानसभा चुनाव में लोकसभा चुनाव वाली सफलता वाला स्ट्राइक रेट ही नतीजों में बदलेगा यानी ज्यादातर सीटें डीएमके के पक्ष में आएंगी.

चेन्नई. तमिलनाडु में कांग्रेस और डीएमके के बीच सीटों के बंटवारे पर गतिरोध कायम है. 234 सीटों वाली विधानसभा (Tamil nadu Assembly Elections 2021) में से कांग्रेस 30 से 34 सीटों की मांग डीएमके से कर रही है जबकि डीएमके फिलहाल 18 से 20 सीटों से ज्यादा देने को तैयार नहीं है. इसके पीछे डीएमके का तर्क है कि 2016 में कांग्रेस को 41 सीटें दी गई थीं जबकि उसने सिर्फ 8 पर जीत दर्ज की. डीएमके के सूत्र कहते हैं कि इस स्ट्राइक रेट पर कांग्रेस इस बार बना बनाया खेल बिगाड़ सकती है इसीलिए डीएमके ज्यादा से ज्यादा सीटें खुद लड़ना चाहती है ताकि राज्य में अगली सरकार स्टालिन के नेतृत्व में बनाई जा सके.

सूत्रों का कहना है कि डीएमके नेतृत्व के साथ पार्टी नेताओं की बैठक में ये फैसला हुआ है कि इस बार कांग्रेस को ज्यादा सीटें देकर सरकार बनाने की अपनी संभावना को खतरे में नहीं डालना चाहिए, इसलिए ज्यादा से ज्यादा सीटों पर खुद लड़ना है.

लोकसभा चुनावों में DMK के खाते में गई थीं 38 सीटें
गौरतलब है कि पिछले लोकसभा चुनाव में DMK ने 39 में से 38 सीटें जीती थीं. डीएमके को लगता है कि जनता उसके साथ है और अगले विधानसभा चुनाव में लोकसभा चुनाव वाली सफलता वाला स्ट्राइक रेट ही नतीजों में बदलेगा यानी ज्यादातर सीटें डीएमके के पक्ष में आएंगी. डीएमके ने कांग्रेस को कम सीटों पर मान जाने पर एक राज्य सभा सीट देने का ऑफर दे सकती है.
कांग्रेस की राजनीति से खफा हैं स्टालिन

अब सवाल यह है कि जो स्टालिन राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने की खुलेआम वकालत कर चुके हैं और कांग्रेस का डीएमके के साथ इतना पुराना गठबंधन है फिर भी इस बार वह राहुल गांधी की दोस्ती के बावजूद कांग्रेस को मनमाफिक सीटें देने को तैयार क्यों नहीं है? कई जानकारों का मानना है कि स्टालिन कांग्रेस की रणनीति से खफा हैं.

युवा नेता भी कर रहे हैं अकेले चुनाव लड़ने पर विचार
बाकी चुनावी राज्यों को छोड़कर कांग्रेस खासतौर से राहुल गांधी तमिलनाडु में पूरे जोर-शोर से प्रचार में जुटे हुए हैं. कांग्रेस के अंदर कुछ युवा नेताओं का विचार अकेले चुनाव लड़ने का भी है, शायद यही वजह है कि राहुल गांधी अपनी पार्टी को दोबारा जिंदा करने के लिए तमिलनाडु में पसीना बहा रहे हैं और यह बात डीएमके को अच्छी नहीं लग रही है.

गठबंधन के सीट शेयरिंग के औपचारिक ऐलान से पहले अकेले आक्रामक चुनाव प्रचार शुरू कर देने की राहुल गांधी की रणनीति को डीएमके ने गठबंधन धर्म के अनुरूप नहीं माना है. सीट बंटवारे में डीएमके के कड़े रुख की एक वजह यह भी है. इसके अलावा पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन के मद्देनजर भी डीएमके इस बार अपनी संभावनाओं को कांग्रेस को ज्यादा सीट देकर कमतर नहीं करना चाहती.

LEAVE A REPLY