दिल्ली पुलिस ने दिशा रवि (Disha Ravi) की जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह महज एक ‘टूलकिट’ (Toolkit Case) नहीं था, असली मंसूबा भारत को बदनाम करने और यहां अशांति पैदा करना था. दिशा ने वॉट्सऐप पर हुई चैट मिटा दी थी, वह कानूनी कार्रवाई से वाकिफ थी. इससे यह जाहिर होता है कि ‘टूलकिट’ के पीछे नापाक मंसूबा था.

नई दिल्ली. ‘टूलकिट’ मामले (Toolkit Case) में गिरफ्तार पर्यावरण एक्टिविस्ट दिशा रवि (Disha Ravi) को पटियाला हाउस कोर्ट से जमानत मिल गई है. दिशा रवि की एक दिन की कस्टडी खत्म होने पर दिल्ली पुलिस ने पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया. जस्टिस धर्मेंद्र राणा ने दिशा की जमानत अर्जी मंजूर कर ली. जस्टिस ने दिशा को एक लाख रुपये के मुचलके पर जमानत दे दी. हालांकि, दिशा के वकील ने कोर्ट में कहा कि दिशा का परिवार इतनी रकम देने में सक्षम नहीं है.

बता दें कि पटियाला हाउस कोर्ट (Patiala House Court) में शनिवार को दिशा की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई थी. एडिशनल सेशन जज धर्मेंद्र राणा की कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जमानत पर फैसला मंगलवार तक के लिए सुरक्षित रख लिया था.

दिल्ली पुलिस ने किसान आंदोलन का समर्थन करने के लिए सोशल मीडिया पर जारी ‘टूलकिट गूगल दस्तावेज’ की जांच के सिलसिले में 13 फरवरी को बेंगलुरु से दिशा रवि को गिरफ्तार किया था. इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने जैकब और मुलुक को ट्रांजिट जमानत दे दी थी.

शांतनु-निकिता से कराना चाहती है दिशा का आमना-सामना
सोमवार को दिल्ली पुलिस ने अदालत में बताया कि दिशा रवि ने सारे आरोप शांतनु-निकिता पर डाल दिए हैं, ऐसे में वो उन तीनों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करना चाहते हैं. दिल्ली पुलिस की ओर से अदालत को जूम मीटिंग की जानकारी दी गई, जिसका संबंध टूलकिट बनाने और आगे बढ़ाने से है.

इससे पहले शनिवार को अदालत में सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने दिशा रवि की जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह महज एक ‘टूलकिट’ नहीं था, असली मंसूबा भारत को बदनाम करने और यहां अशांति पैदा करना था. दिशा ने वॉट्सऐप पर हुई चैट मिटा दी थी, वह कानूनी कार्रवाई से वाकिफ थी. इससे यह जाहिर होता है कि ‘टूलकिट’ के पीछे नापाक मंसूबा था.

शनिवार को हुई सुनवाई में पुलिस ने कहा कि दिशा रवि भारत को बदनाम करने और किसानों के प्रदर्शन की आड़ में अशांति पैदा करने की वैश्विक साजिश के भारतीय चैप्टर का हिस्सा थी. दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में कहा कि एक प्रतिबंधित संगठन सिख फॉर जस्टिस ने 11 जनवरी को इंडिया गेट और लाल किले पर खालिस्तानी झंडा फहराने वाले को इनाम देने की घोषणा की थी.

पुलिस के मुताबिक, किसी तरह यह टूलकिट सोशल मीडिया पर लीक हो गया. पब्लिक डोमेन में ये सर्च में था. उसी को हटाने की साजिश बनाई गई और प्रदर्शन किया गया.

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