दरअसल के-9 वज्र होवित्जर तोप दक्षिण कोरिया की के9 थंडर का स्वदेशी वर्जन है.

नई दिल्ली. सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने गुरुवार को आखिरी बचे 100 के-9 वज्र तोप को भारतीय सेना में शामिल कर लिया. इन तीनों होवित्जर तोपों को परीक्षण के मद्देनजर लद्दाख की ऊंची पहाड़ियों पर तैनात किया गया है. 17 फरवरी को ही ये तोपें लेह आ गई हैं, जहां से इसे परीक्षण के लिए ऊंचाई वाले इलाके में ले जाया जाएगा, ताकि ऐसी जगहों पर भी दुश्मनों के खिलाफ इस हथियार का इस्तेमाल किया जा सके. समाचार एजेंसी एएनआई ने शीर्ष सरकारी सुत्रों के हवाले से गुरुवार को यह जानकारी दी.

सूत्रों के मुताबिक परीक्षण में प्रदर्शन के आधार पर पहाड़ी अभियानों के लिए दो से तीन अन्य रेजीमेंट के लिए भी सेना इन होवित्जर तोपों के ऑर्डर देने पर विचार कर सकती है. सेना प्रमुख ने गुरुवार को गुजरात में सूरत के नजदीक लार्सन एंड टर्बो फैक्टरी का दौरा, जहां होवित्जर तोपों को तैयार किया जा रहा है. सेना में इन तोपों को शामिल करने से लेकर ऑपरेशन में इस्तेमाल करने तक की पूरी प्रक्रिया पर आर्मी चीफ की नजर है.

भारतीय सेना ने दक्षिण कोरियाई कंपनी को 100 ऐसी तोपों के निर्माण का ऑर्डर दिया है, जिन्हें पिछले दो साल से सेना के अलग-अलग रेजीमेंटों में शामिल किया जा रहा है. दरअसल के-9 वज्र होवित्जर तोप दक्षिण कोरिया की के9 थंडर का स्वदेशी वर्जन है.

इन टैंकों की मारक क्षमता 38 किलोमीटर तक की है और इसे दक्षिण कोरियाई कंपनी की साझेदारी से मुंबई की कंपनी लार्सन एंड टर्बो तैयार कर रही है. देश को हिला देने वाले बोफोर्स घोटाले के बाद से भारतीय सेना ने 1986 से लेकर अब तक एक भी भारी-भरकम तोप को शामिल नहीं किया है.

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