बजट 2021: इस बार बजट सत्र के दौरान सांसदों को कैंटीन में खाने के लिए पहले की तुलना में ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है.

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 मार्च 2015 को बजट सत्र के दौरान संसद भवन की पहली मंजिल पर कमरा नंबर 70 में कैंटीन पहुंचकर सभी को आश्चर्यचकित कर दिया था. रिपोर्ट्स के मुताबिक पीएम मोदी ऐसा करने वाले पहले प्रधानमंत्री थे. उन्होंने शाकाहारी ‘थाली’ के लिए 29 रुपये का भुगतान किया. छह साल बाद अब संसद भवन कैंटीन में भोजन पहले की तुलना में अब काफी महंगा हो गया है. पीएम ने 2015 में 29 रुपये का जो थाली ऑर्डर किया था अब उसकी कीमत 100 रुपये है. इस बार बजट में सांसदों को कैंटीन में खाने के लिए पहले की तुलना में ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है. संसद कैंटीन के मेन्यू में सबसे सस्ती 3 रुपये में चपाती मिलती है जबकि सबसे महंगा आइटम 700 रुपये का है.

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने 19 जनवरी को संसद कैंटीन में भोजन पर मिलने वाली सब्सिडी समाप्त करने की घोषणा की थी. पिछले 52 साल से कैंटीन के संचालन का जिम्मा उत्तर रेलवे के पास था जिसे अब भारत पर्यटन विकास निगम (आईटीडीसी) को दे दिया गया है. सूत्रों ने कहा कि आईटीडीसी पांच सितारा अशोका होटल के विशेषज्ञ रसोइयों द्वारा पकाया गया भोजन परोसेंगे. वर्तमान में कैंटीन दोपहर के भोजन और शाम के नाश्ते में कुल 48 खाद्य पर्दाथों को परोसता है.

संसद की कैंटीन में टैक्सपैयर्स के पैसे पर सस्ता भोजन का आनंद लेने वाले सांसदों की आलोचना कई बार हुई थी. पिछले साल तक संसद कैंटीन में खाना सस्ता रखने के लिए सब्सिडी पर 17 करोड़ रुपये खर्च किए जाते थे. समाचार एजेंसी पीटीआई ने बताया कि सब्सिडी को खत्म करने के कदम से सरकारी खजाने में सालाना 8 करोड़ रुपये की बचत होने की उम्मीद है.

हालांकि ऐसा लगता है कि देश की सबसे कुलीन कैंटीन में बहुत कम सांसद खाते हैं. हालिया सर्वेक्षण के अनुसार 17 करोड़ रुपये की सब्सिडी में से केवल 1.4 प्रतिशत यानि 24 लाख रुपये सांसदों पर खर्च किए जाते हैं. बाकी पैसा आगंतुकों, सुरक्षाकर्मियों, सरकारी अधिकारियों और पत्रकारों पर खर्च किया जाता है. एक सत्र के दौरान एक दिन में औसतन लगभग 4,500 लोग संसद में प्रतिदिन भोजन करते हैं.

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