Farmers Protest: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि बॉर्डर पर किसान हैं, हम सब समझ रहे हैं. कृषि मंत्री बात करने के लिए तैयार हैं. चर्चा ही रास्ता है. सरकार ने बातचीत के रास्ते खोल रखे हैं. जिन किसानों के मन में संदेह है, वो बात कर सकते हैं.

नई दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को बजट पेश करने के बाद किसान आंदोलन पर अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि चर्चा ही इस विवाद को हल करने का एकमात्र रास्ता है. सरकार ने बातचीत के रास्ते खोल रखे हैं. कृषि मंत्री बात करने के लिए तैयार हैं.

उन्होंने कहा, “बॉर्डर पर किसान हैं, हम सब समझ रहे हैं. कृषि मंत्री बात करने के लिए तैयार हैं. चर्चा ही रास्ता है. सरकार ने बातचीत के रास्ते खोल रखे हैं. जिन किसानों के मन में संदेह हैं, वो बात कर सकते हैं.”

इससे पहले, बजट भाषण के दौरान, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है. उत्पादन लागत की तुलना में कम से कम 1.5 गुना कीमत सुनिश्चित करने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की व्यवस्था में व्यापक बदलाव आया है. साथ ही किसानों से अनाजों की खरीद और उनको किया जाने वाला भुगतान तेजी से बढ़ा है.

वित्त मंत्री ने बजट भाषण में कहा, “पिछले छह साल में धान, गेहूं, दालों और कपास जैसी फसलों की खरीद कई गुना बढ़ी है. हमारी सरकार किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है. सभी जिंसों के लिए उत्पादन की लागत से कम से कम डेढ़ गुना कीमत सुनिश्चित करने के लिए एमएसपी व्यवस्था में व्यापक बदलाव किए गए हैं.” सीतारमण ने कहा, “किसानों से खरीद लगातार बढ़ रही है. इससे किसानों को किया जाने वाला भुगतान भी काफी बढ़ा है.”
विपक्षी सांसदों ने किया कृषि कानूनों का विरोध
हालांकि सदन में आज वित्त मंत्री ने जैसे ही कृषि क्षेत्र में सरकार की उपलब्धियों को गिनाना शुरू किया, विपक्षी सांसद तीनों हालिया कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग करने लगे. गौरतलब है कि पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हजारों किसान दो महीने से अधिक समय से दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर तीनों हालिया कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.

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