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ब्रिटेन ने G-7 समूह की आगामी बैठक में शामिल होने के लिए भारत को भी निमंत्रण भेजा है. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन खुद भी 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे. डाउनिंग स्ट्रीट ने कहा है कि ब्रिटेन प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने भारत, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया को आगामी जी-7 समिट में शामिल होने के लिए पत्र लिखा है. इस बैठक की मेजबानी ब्रिटेन ही करने वाला है.

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विश्लेषकों का कहना है कि जी-7 के सदस्य देश और भारत-ऑस्ट्रेलिया-दक्षिण कोरिया मिलकर विस्तारवादी और आक्रामक चीन को काउंटर करेंगे. चीन के लिए लोकतांत्रिक देशों का ये समूह तगड़ी चुनौती पेश करेगा. एक्सपर्ट जी-7 की बैठक में भारत को आमंत्रित किए जाने को एक बड़ी उपलब्धि भी करार दे रहे हैं.

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ब्रिटिश प्रधानमंत्री भारत-ब्रिटेन की दोस्ती को मजबूत करने के लिए अगले महीने यानी गणतंत्र दिवस के मौके पर भारत के मेहमान भी बनेंगे. जॉनसन दूसरे ऐसे ब्रिटिश प्रधानमंत्री हैं जो गणतंत्र परेड में शामिल होंगे. इससे पहले, साल 1993 में ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री जॉन मेजर गणतंत्र दिवस की परेड का हिस्सा बने थे. ब्रेग्जिट के बाद ब्रिटेन अपनी विदेश और सुरक्षा नीति में इंडो-पैसिफिक पर जोर दे रहा है और इसलिए भारत उसके लिए काफी अहम हो गया है.

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जॉनसन ने भारत के निमंत्रण को स्वीकार करने के बाद कहा, ब्रिटेन के लिए एक रोमांचक वर्ष की शुरुआत में अगले साल भारत आने पर मुझे खुशी हो रही है, हम अपने द्विपक्षीय संबंधों को विस्तार देने के लिए तत्पर हैं. उन्होंने कहा कि इंडो-पेसिफिक क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में, भारत ब्रिटेन के लिए एक अहम साझेदार है क्योंकि हम नौकरियों और विकास को बढ़ावा देने के लिए काम करते हैं और सुरक्षा के लिए खतरों का मिलकर सामना करते हैं. प्रधानमंत्री बनने के बाद बोरिस जॉनसन का ये पहला अहम द्विपक्षीय दौरा होगा.

डाउनिंग स्ट्रीट ने अपने बयान में कहा है कि यूरोपीय यूनियन से ब्रिटेन के अलग होने के बाद बोरिस जॉनसन का ये पहला द्विपक्षीय दौरा है और इससे इंडो-पैसेफिक को लेकर ब्रिटेन की गंभीरता और प्रतिबद्धताओं का पता चलता है.

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यूके इंडिया बिजनेस काउंसिल के मैनेजिंग डायरेक्टर केविन मैककोले कहते हैं, ब्रेग्जिट के बाद से जॉनसन का पहले द्विपक्षीय दौरे के लिए भारत को चुनना दिखाता है कि भारत ब्रिटेन के लिए कितना मायने रखता है. वह तीसरे ब्रिटिश प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने भारत को अपने पहले दौरे के लिए चुना है. साल 2021 के लिए ये बहुत ही सकारात्मक शुरुआत कही जा सकती है.

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ब्रिटेन ने कहा है कि जॉनसन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जी-7 समिट में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है. इसके अलावा, इस समिट में ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया को भी बुलाया गया है. डाउनिंग स्ट्रीट ने अपने बयान में कहा है कि प्रधानमंत्री जॉनसन लोकतांत्रिक देशों के साथ काम करने के इच्छुक हैं ताकि साझा हितों को आगे बढ़ाया जा सके और साथ ही साझा चुनौतियां से निपटा जा सके. वैसे अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन ने भी तानाशाही देशों के खिलाफ लोकतांत्रिक देशों की एक समिट बुलाने की बात कह चुके हैं. हालांकि, ये स्पष्ट नहीं है कि ये समिट बाइडन की समिट बुलाने की योजना का ही विस्तार है या फिर उनके प्रस्ताव का विकल्प.

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जी-7 में यूके, अमेरिका, फ्रांस, जापान, जर्मनी, इटली और कनाडा शामिल हैं. पहले इस संगठन में रूस भी शामिल था लेकिन साल 2014 में क्रीमिया के कब्जे के बाद उसे इससे बाहर कर दिया गया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को इस साल जी-7 की बैठक में आमंत्रित करने वाले थे लेकिन यूरोप की आपत्ति के बाद ट्रंप को अपनी योजना रद्द करनी पड़ी.

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लद्दाख में भारत से तनाव के बीच ब्रिटिश प्रधानमंत्री के दौरे और जी-7 में भारत को आमंत्रण के फैसले पर चीन भी अपनी नजर बनाए रखेगा. जर्मनी और फ्रांस के बाद, यूरोप के बाकी देशों का इंडो-पैसेफिक में दिलचस्पी लेना और भारत से करीबी बढ़ना जाहिर तौर पर चीन के लिए चिंता की बात होगी.

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बाइडन के सहयोगियों का भी कहना है कि लोकतांत्रिक देशों में रणनीतिक निवेश करके चीन वहां नियम आधारित व्यवस्थाओं को खत्म कर अपनी तानाशाही स्थापित कर रहा है और इसे रोकने के लिए लोकतांत्रिक देशों का गठबंधन बनाना बहुत जरूरी है. अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति बाइडन ने भी कहा है कि रूस गलत जानकारियों, चुनाव में दखल और भ्रष्टाचार के जरिए एक मुक्त वैश्विक व्यवस्था में अव्यवस्था के बीज बो रहा है. रूस ने हाल ही में चीन का समर्थन करते हुए कहा था कि पश्चिमी देश चीन के खिलाफ अपनी लड़ाई में भारत को मोहरा बनाने की कोशिश कर रहे हैं. रूस ने अमेरिका की इंडो-पैसेफिक नीति की भी आलोचना की थी.

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ब्रिटेन के विदेश मंत्री डोमिनिक राब भी भारत के दौरे पर हैं और जॉनसन के दौरे से पहले भारत-ब्रिटेन के संबंधों में व्यापार समेत तमाम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है. ब्रिटेन भारत को दुनिया की सबसे बड़ी फार्मेसी मानता है और भारत दुनिया की कुल वैक्सीन का 50 फीसदी उत्पादन करता है. महाराष्ट्र के पुणे जिले में स्थित सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया में ब्रिटेन की एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की एक अरब से ज्यादा डोज का उत्पादन किया जा रहा है.

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