फ्रांस के राष्ट्रपति को लेकर हो रहे विरोध-प्रदर्शनों को लेकर योगगुरु बाबा ने आजतक से खास बातचीत की. उन्होंने कहा, न तो इस्लाम खतरे में है और ना ही इस्लाम को कोई खतरा है. न कुरान से ना बाइबिल से और न ही दुनिया की कोई किताब से खतरा है. खतरा है आतंकवाद से, कट्टरवाद से. इस वजह से पूरी दुनिया में इस्लाम बदनाम हो रहा है. 

  • नई दिल्ली, 

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों के रुख को अब भारत में भी विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए हैं. भोपाल में कट्टरपंथी और मुस्लिम संगठनों ने बड़ी संख्या में विरोध-प्रदर्शन किया और मैक्रों के पोस्टर जमीन पर फेंक दिए. फ्रांस के राष्ट्रपति को लेकर हो रहे विरोध-प्रदर्शनों को लेकर योगगुरु बाबा ने आजतक से खास बातचीत की. उन्होंने कहा, न तो इस्लाम खतरे में है और ना ही इस्लाम को कोई खतरा है. न कुरान से ना बाइबिल से और न ही दुनिया की कोई किताब से खतरा है. खतरा है आतंकवाद से, कट्टरवाद से. इस वजह से पूरी दुनिया में इस्लाम बदनाम हो रहा है.

उन्होंने आगे कहा, ‘दुनियाभर के मौलानाओं, मौलवियों को यह सोचना पड़ेगा कि क्यों आखिर इस्लाम को मानने वाले लोग ही इस तरह की घटनाओं में आगे आ जाते हैं. किसी का गला काटने या कहीं शरियत ना लागू करने पर, मुस्लिम देशों के ध्रुवीकरण के नाम पर ये जो पूरी दुनिया में फसाद हो रहा है ये आखिर दुनिया को कहां ले जाएगा. ये एक बड़ा सवाल है? कट्टरवाद का झंडा उठाने वाले लोगों को हमें रोकना पड़ेगा.’

इसका समाधान क्या है…

इस समस्या का हल क्या है इस पर भी बाबा रामदेव ने बात की. उन्होंने कहा, “सिर्फ मेरा ही मजहब श्रेष्ठ है, इसके लिए पूरी दुनिया के बड़े मजहबी लोगों को सामने आकर कहना होगा कि ये बातें बंद करो, सभी मनुष्य एक समान हैं. सभी का ईश्वर एक है, उसका जुबान अलग हो सकती है लेकिन अनेक ईश्वर नहीं हैं. अलग-अलग ईश्वर होंगे तो कल को ईश्वर ही लड़ने लग जाएंगे, दुनिया कैसे बचेगी. पूरी दुनिया को ये समझना होगा कि धर्म के नाम पर जो बंटवारा है वो हमें कहीं का नहीं छोड़ेगा. इसलिए समानता की बात करनी होगी, एकता की बात करनी होगी.”

 

जब पूछा गया कि ऐसे विधायकों और नेताओं का क्या किया जाए तो कह रहे हैं कि जब तक मैक्रों माफी नहीं मांगेंगे विरोध जारी रहेगा तो रामदेव ने कहा, “राजनैतिक तौर पर कोई भी कट्टरता का झंडा लेकर चलता है तो उसे प्रदर्शनों की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए. अगर कोई धार्मिक कट्टरता का जहर समाज में घोलता है तो वह अपराध है.” उन्होंने कहा, ‘जो लोग इस तरह के विरोध-प्रदर्शन करते हैं और लोगों का हुजूम जमा करते हैं, उन पर कार्रवाई होनी चाहिए.  मजहबी कट्टरता की अनुमति किसी समुदाय को नहीं होनी चाहिए.’

फ्रांस के राष्ट्रपति पर ये बोले

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने सही किया या गलत? इस सवाल पर रामदेव ने कहा कि उन्होंने मजहबी कट्टरता के खिलाफ आवाज उठाई है, उनका मैं समर्थन करता हूं. उन्होंने कहा कि फ्रांस की लड़ाई आतंकवाद के खिलाफ है, इस्लाम के खिलाफ नहीं. लेकिन फ्रांस सहित दुनिया कई देश जो इस्लामिक कट्टरता को झेल रहे हैं, उसे रोका जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि दुनिया शरियत के हिसाब से नहीं चल सकती, देशों में विभिन्न कानून है, उसी हिसाब से चलना होगा.

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