अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि विकास दुबे ने सरेंडर किया है या पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया गया है. इसपर सस्पेंस बरकरार है.

लखनऊ: कानपुर एनकाउंटर में आठ पुलिसकर्मियों की मौत के जिम्मेदार 5 लाख का इनामी कुख्यात विकास दुबे को एमपी पुलिस ने उज्जैन के महाकाल मंदिर से गिरफ्तार किया है. अब मध्य प्रदेश पुलिस उसे यूपी पुलिस सौंपने जा रही है. विकास को कोर्ट में पेश नहीं किया जाएगा. पहले उसे उज्जैन की कोर्ट में पेश किया जाना था. यूपी पुलिस विकास को लेने के लिए मध्य प्रदेश के लिए रवाना हो चुकी है. लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि विकास दुबे ने सरेंडर किया है या पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया गया है. इसपर सस्पेंस बरकरार है.

 

उत्तर प्रदेश के एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार ने कहा कि विकास दुबे को लाने के लिए पुलिस रवाना हो गई हैं. जो नियम अनुसार कार्रवाई होगी वो की जाएगी. कानपुर मुठभेड़ के जो भी आरोपी फरार चल रहे हैं उनको पकड़ा जाएगा. हम तब तक चैन से नहीं बैठेंगे जब तक सभी अभियुक्तों को सजा न दिला दें.

 

जब विकास दुबे को गिरफ्तार किया गया तो उसने चिल्लाकर कहा कि मैं विकास दुबे हूं कानपुर वाला. पकड़े जाने के बाद भी विकास की हेकड़ी खत्म होती नहीं दिखी. फिलहाल विकास को महाकाल थाने की पुलिस अपने साथ ले गई है.

 

कैसे पकड़ा गया विकास दुबे
कानपुर का कुख्यात गैंगस्टर और आठ पुलिसकर्मियों की हत्या का आरोपित विकास दुबे उज्जैन में सुबह 7:45 अपने कुछ साथियों के साथ महाकाल मंदिर में दर्शन के लिए आया था. विकास ने दर्शन के लिए महाकाल मंदिर की 250 रुपये की पर्ची भी कटाई थी और दर्शन करने लाइन में लगा था. उसे एनकाउंटर का डर भी था शायद इसी वजह से उसने ये रास्ता चुना. इस दौरान वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों को शक हुआ तो उन्होंने पुलिस को सूचना दे दी.

 

शहीद CO के परिवार ने उठाए सवाल
कानपुर एनकाउंटर में शहीद हुए CO देवेंद्र मिश्रा के परिवार ने विकास की गिरफ्तारी पर सवाल उठाए हैं. देवेंद्र मिश्रा के भाई कमलाकांत मिश्रा ने कहा, “एक दिन पहले उसे फरीदाबाद में देखा गया. अगले दिन वह सुरक्षित उज्जैन के महाकाल मंदिर पहुंच जाता है, जबकि फरीदाबाद से उज्जैन की 12 घंटे की रास्ता है. आठ पुलिसकर्मियों की हत्या अकेले विकास दुबे या उसके गैंग ने नहीं की है. उसके साथ और दूसरे लोग भी शामिल थे, जो अबतक उसे बचाते रहे. उन्हीं की सलाह पर उसने सरेंडर भी किया है. इसको मैं पकड़ना नहीं कहुंगा. असल में उसे मौत से बचाया गया है. उसे विश्वास था कि उसे बचा लिया जाएगा.”

 

कानपुर में शहीद हुए सीओ देवेंद्र कुमार मिश्रा के परिवार ने विकास दुबे की गिरफ्तारी पर सवाल उठाया है कि क्या ऐसे ही होती हैं गिरफ्तारियां? उन्होंने कहा, “विकास दुबे का नेटवर्क एक्टिव है. सारे राज्यों की पुलिस और एसटीएफ के अलर्ट रहते हुए भी वो महाकाल मंदिर पहुंच गया. वहां जाकर दर्शन की टिकट कटवाता है. ये कैसे संभव है? इसके बाद जब पुलिस वहां पहुंचती है तो मीडियावालों को लेकर जाती है. क्या ऐसे ही होती है गिरफ्तारियां?”

 

विपक्ष ने क्या कहा
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने विकास दुबे की गिरफ्तारी पर सवाल उठाए हैं. प्रियंका ने सुरक्षा के दावों पर मिलीभगत का आरोप लगाया है और मामले के सीबीआई जांच की मांग की है. प्रियंका ने कहा, “कानपुर के जघन्य हत्याकांड में यूपी सरकार को जिस मुस्तैदी से काम करना चाहिए था, वह पूरी तरह फेल साबित हुई. अलर्ट के बावजूद आरोपी का उज्जैन तक पहुंचना, न सिर्फ सुरक्षा के दावों की पोल खोलता है बल्कि मिलीभगत की ओर इशारा करता है.”

 

उन्होंने आगे एक दूसरे ट्वीट में कहा, “तीन महीने पुराने पत्र पर ‘नो एक्शन’ और कुख्यात अपराधियों की सूची में ‘विकास’ का नाम न होना बताता है कि इस मामले के तार दूर तक जुड़े हैं. यूपी सरकार को मामले की CBI जांच करा सभी तथ्यों और प्रोटेक्शन के ताल्लुकातों को जगज़ाहिर करना चाहिए.”

 

वहीं समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा, “कानपुर कांड का मुख्य अपराधी पुलिस की हिरासत में है. अगर ये सच है तो सरकार साफ करे कि ये आत्मसमर्पण है या गिरफ़्तारी. साथ ही उसके मोबाइल की CDR सार्वजनिक करे जिससे सच्ची मिलीभगत का भंडाफोड़ हो सके.”

 

सोशल मीडिया पर सवाल
गैंगस्टर विकास दुबे की गिरफ्तारी पर सोशल मीडिया पर भी कई लोग सवाल उठा रहे हैं. श्रीनिवास बीवी ने एक वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा, “इस वीडियो में कौन-से ऐंगल से आतंकवादी विकास दुबे को उज्जैन पुलिस ने ‘गिरफ्तार’ किया है? सब कुछ स्क्रिप्टेड था, ये वीडियो गवाही है.”

 

 

पत्रकार विनोद कापड़ी ने ट्वीट में लिखा, “तो क्या विकास दुबे की गिरफ़्तारी का ड्रामा रचा गया? अगर नहीं तो कल रात महाकाल मंदिर में क्या कर रहे थे उज्जैन के डीएस/एसपी? कल देर रात उज्जैन के महाकाल मंदिर में DM आशीष सिंह और SP मनोज कुमार पहुंचे और आज सुबह उसी मंदिर से विकास दुबे की गिरफ़्तारी. ये महज संयोग है या?”

 

जर्नलिस्ट अनुराग मुस्कान ने कहा, “कानपुर देहात के एक गांव से उज्जैन तक ना जाने कितने बॉर्डर, ना जाने कितने टोल, नाके और ना जाने कितने पुलिस चैकपोस्ट पार करता रहा विकास दुबे और पुलिसवाले हमारी गाड़ियों की डिक्की खुलवाकर तलाशी लेते रह गए.”

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