महाराष्ट्र विधान परिषद की नौ सीटों के लिए 21 मई को होने वाले चुनाव में कांग्रेस दो की बजाय एक प्रत्याशी खड़ा करने पर सहमत हो गई। इसके साथ ही राज्य विधायिका के उच्च सदन में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे समेत अन्य प्रत्याशियों के निर्विरोध चुने जाने का रास्ता साफ हो गया है।

कांग्रेस के सूत्रों के अनुसार पार्टी जालना जिला परिषद के सदस्य राजेश राठौड़ को प्रत्याशी के रूप में खड़ा करेगी। इससे पहले कांग्रेस ने दो प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारने की घोषणा की थी, लेकिन अब वह एक उम्मीदवार पर सहमत हो गई है। इसके बाद ठाकरे का विधान परिषद में जाने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। विधान परिषद के वर्तमान सदस्यों का कार्यकाल 24 अप्रैल को समाप्त होने के बाद नौ सीटें खाली हो गई थीं।

सत्ताधारी गठबंधन महा विकास अघाड़ी ने अब तक राठौड़ समेत पांच उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की है। विपक्षी दल भाजपा ने शुक्रवार को अपने चार उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की थी। ठाकरे राज्य विधायिका के किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। शिवसेना ने ठाकरे के अतिरिक्त विधान परिषद की वर्तमान उपाध्यक्ष नीलम गोर्हे को प्रत्याशी बनाया है। राकांपा की ओर से शशिकांत शिंदे और अमोल मितकारी उम्मीदवार हैं। भाजपा की ओर से रंजीत सिंह मोहिते पाटिल, गोपीचंद पडलकर, प्रवीण दटके और अजित गोपछाड़े उम्मीदवार हैं।

प्रत्याशी न बनाने से नाराज नहीं : पंकजा मुंडे

भाजपा नेता पंकजा मुंडे ने कहा है कि वह आगामी विधान परिषद चुनाव के लिए पार्टी द्वारा नामांकित नहीं किए जाने से नाराज नहीं थीं। मुंडे ने एक ट्वीट में अपने समर्थकों से हतोत्साहित नहीं होने के लिए कहा है।

उन्होंने कहा कि हम दोनों एक-दूसरे के लिए हैं और साहेब (पिता गोपीनाथ मुंडे) का आशीर्वाद हमारे साथ है। पूर्व भाजपा मंत्री पिछले साल के विधानसभा चुनाव में अपने चचेरे भाई और राकांपा नेता धनंजय मुंडे से परली सीट से हार गई थीं। उन्होंने कहा कि वह इस बात से नाराज नहीं थी कि 21 मई को द्विवार्षिक चुनाव के लिए उन्हें टिकट न देकर यह मौका नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि आपने मेरी मां और बहन (बीड सांसद प्रीतम) को फोन किया। आपने अपनी निराशा व्यक्त करने के लिए मुझे फोन किया, मैंने फोन नहीं उठाया क्योंकि मैं कुछ नहीं कहना चाहती। मैं परेशान नहीं हूं। पार्टी के चारों उम्मीदवारों को मेरी शुभकामनाएं।

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