कांग्रेस इस बार निगम में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है इसलिए कांग्रेसी नेता चाहते हैं कि इस बार निगम में कांग्रेस की सरकार काबिज हो.

/धमतरी: छत्तीसगढ के धमतरी महापौर और सभापति के चुनाव की तारीख अभी घोषित नहीं हुई है, लेकिन कांग्रेसी और भाजपा ने अपने स्तर पर आवश्यक तैयारी कर ली हैं. कांग्रेस इस बार निगम में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है इसलिए कांग्रेसी नेता चाहते हैं कि इस बार निगम में कांग्रेस की सरकार काबिज हो. वहीं दूसरी ओर बहुमत से दूर होने के बावजूद भी भाजपाई दावा कर रहे हैं कि वो निगम में अपनी प्रतिष्ठा को बरकरार रखेंगे. सूत्रों के अनुसार दोनों ही पार्टियां के पार्षदों से क्रॅास वोटिंग कराने के लिए होड़ मची हुई है, शायद यही वजह है कि संगठन के नेता अपने पार्षदों पर खुफिया नजर रखे हुए हैं.

आपको बता दे कि पिछले दिनों हुए नगर निगम चुनाव में कांग्रेस को 18 सीट मिली थी तो वहीं भाजपा को 17 सीट मिली थी. पांच निर्दलीयों भी निगम चुनाव में बाजी मारकर और पार्षद चुनकर सामने आए थे. इनमें रूपेश राजपूत, हेमंत,बंजारे श्यामा साहू,ज्योति वाल्मीकि, कमलेश सोनकर चुने गए. इनमें से निर्दलीय रूपेश राजपूत, कमलेश सोनकर और ज्योति वाल्मीकि ने कांग्रेस को समर्थन देने का दावा किया है. वहीं निर्दलीय हेंमत बंजारे ने भाजपा में फिर वापसी की है. गणित के अनुसार कांग्रेस के पास 21 और भाजपा के पास 19 पार्षद है. कांग्रेस नेताओं ने अपने करीब 19 पार्षदों को अनियंत्रित सुरक्षित स्थान पर ले जाकर रखा है. यहां उन्हें पार्टी के नेता कांग्रेस द्वारा घोषित प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करने के लिए मानसिक रूप से तैयार कर लिया है.

कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि महापौर और सभापति के लिए पार्षदों से रायशुमारी की जा रही है. सूत्रों के अनुसार विजय देवांगन का महापौर और अनुराग मशीह का सभापति के लिए नाम आगे आया है. इसी तरह एमआईसी के लिए रूपेश राजपूत, राजेश पांडे, राजेश ठाकुर, आवेश हाशिमी, संजय नागौर, नीलू पवार, दीपक सोनकर के नाम की चर्चा है. भाजपा नेताओं को कांग्रेस में क्रॅास वोटिंग पर ज्यादा भरोसा है. कुछ नेताओं को पार्षदों और उनके रिश्तेदारों से संपर्क करने का निर्देश दिया गया है.

भाजपा में महापौर पद के लिए धनीराम सोनकर का नाम सबसे आगे चल रहा है. वहीं निगम में महापौर सभापति का चुनाव कराने के लिए कांग्रेस ने कैबिनेट मंत्री कवासी लखमा और भाजपा के विधायक ने अजय चंद्राकर को अपना पर्यवेक्षक बनाया है.
बता दें कि निगम चुनाव के समय लखमा ने कांग्रेस के पक्ष में कई वार्डों में सभाएं की थी, और यहां कांग्रेस को सफलता भी मिले जबकि अजय चंद्राकर चुनाव में सक्रिय तो नहीं रहे, लेकिन टिकट वितरण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही. इस तरह उक्त दोनों नेताओं की भी प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है.

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