खाली खजाना, किसान कर्ज माफी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना और बेरोजगारी दूर करना कमलनाथ सरकार के लिए चुनौती है.

भोपाल: कमलनाथ सरकार के लिए 2019 कई मायनों में खास रहा. किसान कर्जमाफी के दूसरे चरण की शुरुआत, मैग्निफिसेंट एमपी के सफल आयोजन से सरकार का आत्मविश्वास बढ़ा. लेकिन, 2020 में सरकार के लिए चुनौतियां कम नहीं है. नया साल चुनौतियों भरा है. खाली खजाना, किसान कर्ज माफी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना और बेरोजगारी दूर करना कमलनाथ सरकार के लिए चुनौती है.

खाली खजाना

कमलनाथ सरकार साल भर में 14 बार कर्ज ले चुकी है. कांग्रेस सरकार का कर्ज का आंकड़ा 12 हजार 600 करोड़ पूरा कर चुका है. सभी विभागों पर राजस्व संग्रहण की बड़ी चुनौती है.

किसान कर्ज माफी

किसान कर्ज माफी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना सरकार के लिए चुनौती है. फिलहाल कर्जमाफी का दूसरा चरण चल रहा है. पहले चरण में 50 हजार तक का कर्ज माफ किया गया था. अब 2 लाख तक के कर्ज को माफ किया जा रहा है.

राजनैतिक चुनौतियां

प्रदेश सरकार पर निर्दलीय दबाव बना रहे हैं. बीजेपी भी बार-बार सरकार गिराने की धमकी देकर चुनौती देती रहती है. CM कमलनाथ के सामने राजनैतिक चुनौतियां भी हैं.

सरकार के सामने कई हिडन चैलेंज

पार्टी के अंदर भी कमलनाथ और सरकार को चुनौती देने वाले कम नहीं हैं. उमंग सिंघार, ज्योतिरादित्य सिंधिया, लक्ष्मण सिंह समेत कई नेता अपने बयानों से सरकार की मुश्किलें खड़ी कर देते हैं.

कार्यकर्ताओं की संतुष्टि

आम जनता की संतुष्टि के साथ कार्यकर्ताओं की संतुष्टि भी बड़ी चुनौती है. गुटों में बंटी कांग्रेस में कमलनाथ को इस बड़ी चुनौती से भी जूझना है कि कार्यकर्ता खुश रहें.

साल 2020 चुनावी साल साबित होगा

नगरीय निकाय चुनाव, पंचायत चुनाव, जौरा विधानसभा का उपचुनाव, राज्यसभा चुनाव, मंडी चुनाव में कांग्रेस को साबित करना होगा कि वो जनाधार वापिस हासिल कर रही है.

वचन पत्र में किए गए वायदों को पूरा करना 

वचन पत्र के कई बिंदू लोकलुभावन जरूर हैं, लेकिन ब्यूरोक्रेसी उसके खिलाफ है. मसलन, पुलिस का वीकली ऑफ, पदनाम बदलना, अनार्थिक मांगे जो तुरंत पूरी की जा सकती हैं. लेकिन अफसरों की जिद के चलते ये पूरी नहीं हो पा रही हैं. इसके अलावा वचन जल्द से जल्द पूरा करने के लिए अलग-अलग वर्ग दबाव भी बना रहे हैं. उनसे निपटना सरकार के लिए इस साल भी चुनौतीपूर्ण होगा.

कर्मचारियों के आंदोलन

असिस्टेंट प्रोफेसर का मसला सुलझाने के बाद अब अतिथि विद्वानों का आंदोलन सरकार को चुनौती दे रहा है. वहीं, अतिथि शिक्षक भी आंदोलन करने लगे हैं. मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टरों ने इस्तीफे देकर नई परेशानी खड़ी कर दी है. लेकिन सरकारी कर्मचारियों को अभी भी वचन पूरा होने का इंतजार है.

नए उद्योग लाना

मैग्निफिसेंट एमपी कार्यक्रम में सीएम कमलनाथ ने उद्योग स्थापित करने का विश्वास तो जीता है. अब उन उद्योगों की स्थापना बड़ी चुनौती है.

बेरोजगारी दूर करना

बेरोजगारी दूर करने के लिए सरकार ने रास्ते खोल दिये हैं. उद्योगपतियों को आकर्षित करना, एमपी के युवाओं को नौकरी में वरीयता और ट्रेनिंग स्कूल्स की स्थापना जैसे कदम उठाए गए हैं. साल 2020 में अब नजर रहेगी बेरोजगारी कितनी दूर होती है.

कुदरती चुनौतियां

कमलनाथ सरकार के सामने प्राकृतिक आपदाएं लगातार चुनौती बनी हुई हैं. भीषण गर्मी, बरसात के बाद अब सरकार के सामने भीषण ठंड में ओला वृष्टि चुनौतीपूर्ण है. सरकार के सामने किसानों को कुदरती मुसीबतों से बचाने की बड़ी चुनौती है.

बुनियादी सहूलियतें

प्रदेश में जर्जर सड़कें, कर्मचारियों की कमी, शिक्षकों और डॉक्टरों की कमी को दूर करके मध्य प्रदेश में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, सड़क, पानी, बिजली जैसी बुनियादी सहूलियतें बढ़ाना.

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