आईएएस एसोसिएशन अध्यक्ष की मनमानी भी बर्दाश्त नहीं
दागदार, निरंकुश अफसरों की तरफदारी पड़ी भारी
विवादित अफसरों की फील्ड पोस्टिंग की भी होगी जांच

 अन्य चार आईएएस भी सरकार के  टारगेट पर
 सक्रियता और योग्यता ही होगी प्राथमिकता

/समय जगत, भोपाल। हाल ही में ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव के परिवर्तन से यह स्पष्ट संकेत मिले हैं कि वर्तमान सरकार किसी भी कीमत पर अब ब्यूरोक्रेट्स की मनमानी को बर्दाश्त करने के मूड़ में नहीं है। आधे से अधिक मंत्री अपने प्रमुख सचिवों को उनकी मनमानी के चलते अपने कार्य में असहजता महसूस कर रहे हैं और इसकी पीड़ा वह अनेकों बार मुख्यमंत्री कमलनाथ को व्यक्त भी कर चुके हैं। जिसमें एक खेमे विशेष के तो लगभग सभी मंत्री इस पीड़ा से गुजर रहे हैं लेकिन हाल ही के परिवर्तन में आईएएस एसोसिएशन की अध्यक्ष अपर सचिव ग्रामीण विकास विभाग का जिस तरह से परितर्वन कर हाशिए पर डाला गया है, उसने सभी को चौंका भी दिया है। साथ ही सरकार ने यह संकेत भी दिया है कि तेज तर्राट, सक्रिय आईएएस को सरकार की प्राथमिकता वाले विभागों में प्रमुखता से पदस्थ किया जाएगा। इसके लिए पिछली सरकार के कार्यकाल की कार्य परिणीति, परिणाम को भी ध्यान में रखते हुए पदस्थापना पर विचार किया जाएगा। पिछली सरकार के कार्यकाल में जहां अपनी कार्यशैली के लिए विवादास्पद और चर्चित आईएएस को जो कि प्रदेश से बाहर हैं उनकी तरफदारी भी एसोसिएशन की अध्यक्ष को भारी पड़ी।
अभी हाल ही में टेंडर घोटाले की प्रक्रिया में चर्चा में आए दो आईएएस के सुपुत्रों से जुड़ी कंपनियों की कारगुजारियों की भी परतें खोलनेे के मूड में सरकार नजर आ रही हैं। क्योंकि निर्माण विभागों के मैन्युअल जो कि कैबिनेट से अनुमोदित होते हैं उनमें बाद में कैबिनेट के बगैर किसी भी कंपनी या व्यक्ति को लाभ पहुंचाने की दृष्टि से परिवर्तन या संशोधन करना या करवाना एक गंभीर अपराध है और ऐसी स्थिति में इन मामलों से जुड़े या अन्य किसी भी मामले में एसोसिएशन की अध्यक्ष द्वारा विवादित आईएएस की तरफदारी भी उनको भारी पड़ गई। जिसको सरकार ने गंभीरता से लिया। वहीं दूसरी ओर ग्रामीण विकास विभाग में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत के पदों पर ग्रामीण विकास विभाग के दागदार, विवादित अफसरों की पदस्थापना को भी गंभीरता से लिया है। विभाग में निर्विवाद रूप से उपलब्ध अधिकारियों की लंबी श्रृंख्ला के बाद भी विवादित अधिकारियों की फील्ड पोस्टिंग भी विभाग में चर्चा का विषय है। कहने को तो पदस्थापना का विषय मुख्यमंत्री और मंत्री के अधिकार क्षेत्र का मामला है, लेकिन उनके गंभीरतम विषयों को सरकार के संज्ञान में नहीं लाने को भी गंभीरता से लिया गया है। इसी प्रकार से समान प्रकृति के न्यायालय से दोष सिद्ध प्रकरणों में एक अधिकारी को सेवा से पृथक किया
गया तो वहीं दूसरी ओर एक अधिकारी को पुरस्कृत करते हुए फील्ड पोस्टिंग दे दी गई।
वहीं दूसरी ओर अपनी सक्रियता और योग्यता के लिए चर्चित अधिकारी को पिछली सरकार द्वारा अचानक ही महत्वहीन विभाग में पदस्थ करने के पीछे भी पिछले सरकार के मुंहलगे आईएएस कॉकस का ही हाथ माना जा रहा था। वर्तमान सरकार अब पिछली सरकार के पक्षपात को भी ध्यान में रखते हुए अधिकारी की सक्रियता और दक्षता को महत्व देती नजर आ रही है। यह संकेत ग्रामीण विकास विभाग में वर्तमान में की गई पदस्थापना से भी नजर आ रहे हैं और इस परिवर्तन से सरकार ने आईएएस एसोसिएशन को भी एक आइना दिखा दिया है।
अब देखना यह है कि पिछली सरकार के अपर मुख्य सचिव के विवादित निर्णयों से बदहाल हुए विभाग की बदहाली पर उनके बाद के अपर मुख्य सचिव जहां कुछ खास न कर सके वहीं वर्तमान सरकार के अपर मुख्य सचिव भी उस बदहाली पर ध्यान न देते हुए अन्य विषयों में विवादित रहे। ऐसी स्थिति में बदहाली से बेपटरी हुए विभाग को पुन: पटरी पर लाने की कवायद में यह परिवर्तन कितना सार्थक होगा यह तो समय और अधिकारी की सक्रियता
ही बताएगी।

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