संदर्भवश अशोक त्रिपाठी  प्रधान संपादक 9425037578

सपा संस्थापक श्री मुलायम सिंह यादव के जन्मदिन पर विशेष
देश की समाजवादी राजनीति का चेहरा बने श्री मुलायम सिंह यादव की शख्सियत किसी सहारे की मोहताज नहीं है। नेताजी के नाम से मशहूर पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व रक्षा मंत्री और समाजवादी पार्टी के संस्थापक आज पूरे 80 बरस के हो चुके हैं। आज जन्म दिन के अवसर पर शुभेच्छा है कि वे जीवन के शताधिक बसंत दर्शन करते हुए आने वाली पीडिय़ों का भी मार्गदर्शन करते रहें। अनुभव की पूंजी के मान से मुलायम सिंह जी के कद के कम ही लोग राजनीतिक अखाड़े में शेष बचे हैं। शून्य से शिखर तक पहुंचने वाली इस शख्सियत की जीवनी कई मायनों में अद्भुत और अतुल्य है। 22 नवंबर 1939 को उत्तरप्रदेश के इटावा जिले के सैफई गांव में जन्मे श्री मुलायम सिंह का संबंध जमीन से जुड़े किसान परिवार से है। किसानी पृष्ठभूमि और ठेठ देसी अंदाज के कारण आपको ‘धरती पुत्रÓ भी कहा जाता है। पहलवानी का शौक रखने वाले मुलायम सिंह जी ने अपने कॅरियर की शुरूआत शिक्षक के रूप में की थी। मास्टर मुलायम सिंह चुनाव में खड़े हुए और इलाके के अध्यापक साथियों के परिजनों और विद्यार्थियों के अभिभावकों से पांच-पांच रुपये तथा समय सहयोग लेकर चुनाव के मैदान में उतरे और जीत भी गए। उनकी राजनीति की शुरूआत सोशलिस्ट पार्टी से शुरू हुई और फिर वे प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के सहारे आगे बढ़े। 1977 में कांग्रेस विरोधी लहर में उत्तर प्रदेश में भी जनता सरकार बनी और इस प्रकार तब वे पहली बार राज्य के मंत्री बने। गंगा-जमुनी तहजीब के लिए मशहूर उत्तर प्रदेश में सामाजिक सद्भाव बनाए रखने में धर्मनिरपेक्ष छवि के जन-नेता मुलायम सिंह जी का साहसिक योगदान हमेशा याद किया जाता रहेगा। राष्ट्रवाद, लोकतंत्र, समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता के सिद्धान्तों में उनकी अटूट आस्था के इतिहास ने कई बार दर्शन किए हैं। भारतीय भाषाओं, संस्कृति और शोषित पीडि़त वर्गों के हितों के लिए उनके हृदय में हमेशा विशेष स्थान रहा है और इनके संरक्षण के प्रति उनके मन की गहरी टीस और संघर्ष उन्हें आम जनता के करीब लाकर खड़ा कर देती है। छोटी कद-काठी वाले मुलायम सिंह जी का व्यक्तित्व इतना विशाल है कि उसकी बराबरी करने यदि कई व्यक्ति एक साथ भी खड़े हो जाएं तो उन सबका साझा ‘व्यक्तित्व-समूह भी शायद बौना पड़ जाएगा। मुलायम सिंह जी को विराट व्यक्तित्व का लाभ तो मिला ही, लेकिन उन्हें अपने शारीरिक रूप से अपने छोटे कद का भी फायदा कई बार मिला है। इसका एक उदाहरण तो यह है कि- राजनीति की शुरूआत के समय बैंक निदेशक का चुनाव जीतने के बाद हुए जलसे में प्रतिद्वंद्विता के कारण चली गोली में मुलायम सिंह जी अपने छोटे कद के कारण बच गए, तब गोली उनके पीछे खड़े एक लंबे आदमी को लगी थी, जो वहीं ढेर हो गया था। समाजवाद के प्रवर्तक और प्रख्यात नेता श्री राम मनोहर लोहिया को अपना आदर्श मानने वाले ‘सच्चे गुरु के पक्के चेले श्री मुलायम सिंह ने 4 अक्टूबर 1992 को समाजवादी पार्टी का गठन किया, और सपा सुप्रीमो रहते हुए वे उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और देश की सरकार तय करने वाले महत्वपूर्ण राज्य के तीन बार मुख्यमंत्री रहे। केंद्रीय राजनीति में श्री सिंह का प्रवेश 1996 में हुआ, जब काँग्रेस पार्टी को हराकर संयुक्त मोर्चा ने सरकार बनाई। एचडी देवेगौड़ा के नेतृत्व वाली इस सरकार में वह रक्षामंत्री बनाए गए। भारतीय जनता पार्टी के साथ उनकी विमुखता से लगता था, वह काँग्रेस के नजदीक होंगे, लेकिन 1999 में उनके समर्थन का आश्वासन ना मिलने पर काँग्रेस सरकार बनाने में असफल रही और दोनों पार्टियों के संबंधों में कड़वाहट पैदा हो गई। पिछली लोकसभा के अंतिम सत्र को संबोधित करते हुए मुलायम सिंह जी के विदाई भाषण के दौरान भारतीय राजनीति के जानकार तब भौंचक्के रह गए थे जब उन्होंने श्रीमती सोनिया गांधी के ठीक बगल में खड़े होकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के व्यक्तित्व, कार्यप्रणाली और कार्यकाल की तारीफ करते हुए उन्हें फिर से चुनकर आने और पुन: प्रधानमंत्री पद पर आसीन होने की शुभकामनाएं व्यक्त करते हुए उन्हें महान नेता बताया था। हांलांकि 1990 में विश्व हिन्दू परिषद के आह्वान पर अयोध्या में कारसेवा के लिए उमड़े साधु-सन्तों और हिन्दू समाज के बड़े आन्दोलन का सख्ती से दमन करने और मुस्लिम तुष्टिकरण और जातिवाद व वंशवाद को बढ़ावा देने और कम्प्यूटर क्रांति और आधुनिकीकरण का विरोध करने के गंभीर आरोप भी उन पर लगे हैं, वे कई मौकों पर कारसेवकों के दमन के लिए हुए गोलीकांड को सही ठहराते रहे हैं। उन्होंने हमेशा कहा है कि देश की एकता के लिए गोली चलवाई थी। आज जो देश की एकता है उसी वजह से है। इसके लिए और भी लोगों को मारना पड़ता, तो सुरक्षाबलों को मारने की अनुमति दे देते। फिर भी अपने लंबे राजनैतिक जीवन के दौरान श्री मुलायम सिंह यादव ने आम-जनता की सेवा का जो बड़ा काम किया है उसे कतई नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। राजनैतिक विचार भिन्नता के बावजूद भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्र के प्रति उनकी अदम्य निष्ठा के चलते निर्मित हुए उनके व्यक्तित्व एवं आभामंडल की बानगी यह है कि पूर्व संघ प्रमुख श्री कुप्प सी सुदर्शन जी उनसे व्यक्तिश: भेंट करने श्री यादव के निवास पर पहुंचे थे, तथा लंबी अनौपचारिक चर्चा की थी। इसके अलावा उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी भी उनके निवास पर जाकर उनसे व्यक्तिगत रूप से मिलते रहे हैं। प्रखर राजनेता श्री मुलायम सिंह पर ‘मुलायम सिंह यादव : चिन्तन और विचार, ‘मुलायम सिंह ए पोलिटिकल बायोग्राफी आदि नामों से पुस्तकें भी प्रकाशित हुई हैं, जिनमें उनके सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनैतिक महत्व को रेखांकित करते हुए कई अछूते विषयों से पाठकों को अवगत कराया गया है। इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ़ जूरिस्ट के द्वारा उन्हें 28 मई, 2012 को लंदन में ‘अंतर्राष्ट्रीय जूरी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। समाज में भाईचारे की भावना पैदाकर मुलायम सिंह यादव का लोगों को न्याय दिलाने में विशेष योगदान है। उन्होंने कई विधि विश्वविद्यालयों में भी महत्वपूर्ण योगदान किया है। जनहितैषी कार्यों के चलते उनकी लोकप्रियता की पराकाष्ठा यह थी कि युवावस्था में बहुत कम राजनैतिक अनुभव रखने वाले उनके पुत्र श्री अखिलेश यादव के नेतृत्व को उत्तर प्रदेश की जनता ने हाथों-हाथ लिया और उत्तरप्रदेश जैसे आलादर्जा सूबे की सदारत मुख्यमंत्री के रूप में उन्हें सौप दी। भाई शिवपाल और निकटस्थ साथी श्री अमर सिंह तथा आजम खान ने नेताजी का पग-पग पर साथ दिया। श्री मुलायम सिंह के इस बड़े कद के पीछे इन तीनों का योगदान भी भुलाने के काबिल नहीं है। हांलांकि राजनीति के तकाजों ने बीते दिनों में कड़वी सचाईयों से उन्हें रूबरू कराया है और इसके चलते उनका परिवार भी बिखरा है, पर अपने आदर्शों और सिद्धान्तों को बचाने के लिए मुलायम सिंह जी ने कभी भी फायदे-नुकसान का विचार नहीं किया, यही कारण है कि तमाम मतभेदों के बावजूद उनके निर्वाचन क्षेत्र मैनपुरी और उत्तर प्रदेश की जनता के साथ-साथ ही पक्ष-विपक्ष के तमाम नेता उनकी ‘मोम जैसी मुलायम और ‘सिंह जैसी सख्त शख्सियत को तवज्जो भी देते हैं और उसकी कद्र भी करते हैं। उत्तर भारत की राजनीति का यह बड़ा चेहरा चांद सा चमकता रहे और इसकी चांदनी में समाजवाद को नई दिशा मिले इसी शुभकामना के साथ जन्म दिन की बधाई और अशेष मंगल कामनाएं।

 

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