अभी जिन कंपनियों का टर्नओवर 250 करोड़ तक है, उसे 25 फीसदी कॉरपोरेट टैक्स जमा करना पड़ता है. उससे ज्यादा टर्नओवर वाले कंपनियों को 30 फीसदी का टैक्स जमा करना पड़ता है.

नई दिल्ली: कॉरपोरेट जगत को इस बजट (Budget 2019) से काफी उम्मीदें हैं. बजट से पहले कॉरपोरेट जगत के लोगों के साथ वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण की कई दौर की बैठक हो चुकी हैं. इनकी मांग है कि वर्तमान में जो टैक्स वसूला जा रहा है वह बहुत ज्यादा है, साथ ही टर्नओवर के आधार पर कंपनियों के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए. अभी जिन कंपनियों का टर्नओवर 250 करोड़ तक है, उन कंपनियों को 25 फीसदी कॉरपोरेट टैक्स जमा करना पड़ता है. उससे ज्यादा टर्नओवर वाले कंपनियों को 30 फीसदी टैक्स जमा करना पड़ता है. साथ ही डिविडेंड जारी करने पर अलग से टैक्स लगता है.

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के डेटा के मुताबिक, भारत में करीब 8 लाख ऐसी कंपनियां हैं जिनका टर्नओवर 250 करोड़ से नीचे है और इन्हें 25 फीसदी टैक्स जमा करना पड़ता है. जबकि, मात्र 7000 ऐसी बड़ी कंपनियां हैं जिनका टर्नओवर 250 करोड़ से ज्यादा है और 30 फीसदी टैक्स जमा करना पड़ता है. इनमें से केवल 100 बड़ी कंपनियां मिलकर कुल कॉरपोरेट टैक्स का 40 फीसदी जमा करते हैं.

 

ये कंपनियां टर्नओवर के आधार पर भेदभाव को दूर करने की लगातार मांग कर रही हैं. इनका कहना है कि देश के विकास में और रोजगार पैदान करने में इनका ज्यादा योगदान है. अगर विदेशी कंपनियों से मुकाबला करना है और रोजगार को बढ़ावा देना है तो जरूरी है कि हमें समान अवसर मिले.

 

एक रिपोर्ट की मुताबिक, ग्लोबल एवरेज कॉरपोरेट टैक्स 23.6 फीसदी तक पहुंच गया है. ऐसे में बड़ी कंपनियों पर भारत में टैक्स का बहुत बड़ा बोझ है. जानकारी के मुताबिक, इंग्लैंड में कॉरपोरेट टैक्स 19 फीसदी, अमेरिका में 21 फीसदी और चीन में 25 फीसदी के आसपास है.

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