ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण धार नगरी की स्थापना राजा भोज ने की थी। यह शहर मां सरस्वती के प्रसिद्ध मंदिर ‘भोजशाला के कारण विशेष रूप से जाना जाता है। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में भी धार की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। इस लोक सभा क्षेत्र के स्वरूप में कई बार बदलाव हुआ, अंतिम बदलाव वर्ष 2009 में हुआ। यह सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है। धार की कुल आबादी 25,47,730 है, जिसमें से 78 प्रतिशत जनसंख्या यहां गांवों मे रहती है जबकि 21 प्रतिशत आबादी शहरों में निवास करती है। पूर्ववर्ती दिग्विजय शासन काल में इस सांस्कृतिक नगर का नाम सांंप्रदायिक हिंसा के लिए बदनाम हुआ। मध्य प्रदेश राज्य के गठन के बाद 1967 से लेकर 2014 के बीच हुए 13 चुनावों में सात बार कांग्रेस ने अपना परचम लहराया। भाजपा के हिस्से में यहां तीन बार ही जीत आई है। कांग्रेस के गजेंद्रसिंह राजूखेड़ी यहां से तीन बार जीत दर्ज करा चुके हैंं, वहीं भारतसिंह चौहान दो बार जनसंघ से और एक बार भारतीय लोक दल के टिकिट से जीतकर संसद पहुंंचे हैंं। इसके अलावा कांग्रेस के सूरजभान सिंह सोलंकी और भाजपा के छतरसिंह दरबार भी यहां से दो बार सांसद चुने जा चुके हैं। 2014 में यहां 16 लाख 68 हजार 441 मतदाताओं में से 5,86,865 पुरुष और 4,89,951 महिला मतदाता शामिल थे इनमें से 10 लाख 76 हजार 816 मतदाताओं ने मताधिकार का प्रयोग किया था। भाजपा प्रत्याशी सावित्री ठाकुर 5 लाख 58 हजार 387 वोट प्राप्त कर अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस उम्मीदवार उमंग सिंघार से 1 लाख 4 हजार 328 मतों से जीती थीं। उमंग को 4 लाख 54 हजार 59 वोट, बसपा उम्मीदवार अजय रावत को 14 हजार 666 और आम आदमी पार्टी की प्रत्याशी हेमलता जमुना देवी को 10 हजार 683 वोट प्राप्त हुए थे। 2019 के रण में भाजपा ने पूर्व सांसद और बाहुबली नेता छतरसिंह दरबार को प्रत्याशी बनाकर मैदान में उतारा है। दरबार को टक्कर देने कांग्रेस ने दिनेश गिरवाल को अपना उम्मीदवार बनाया है। वे बदनावर क्षेत्र के रूपाखेड़ा के निवासी हैं । तथा उनकी पत्नी जिला पंचायत सदस्य हैं। वह ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक बदनावर विधायक राजवर्धन सिंह दत्तीगांव के भी करीबी हैं। धार के बारे में कहा जाता है कि यहां के मतदाताओं की पसंद हर बार बदलती रहती है, और वे लोकप्रिय चेहरों पर ही भरोसा जताते हैं। ऐसे में धार का अगला सांसद कौन होगा इस पर अभी संशय बरकरार है, लेकिन आने वाली 23 तारीख को इस राज से परदा हट जाएगा।

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