/राजेश सत्यम, भोपाल/  मध्य प्रदेश के इंदौर लोकसभा क्षेत्र में अंतिम चरण में 19 मई को 23.5 लाख मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग करेंगे। इंदौर लोकसभा क्षेत्रांतर्गत कसरावद, खरगोन, महेश्वर, भगवानपुरा, सेंधवा, राजपुर, पानसेमल और बड़वानी आदि 8 विधानसभा सीटें आती हैं। इस लोकसभा सीट पर पहली बार 1952 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के नन्दलाल जोशी जीते थे। बाद में 1957 में कांग्रेस के कन्हैयालाल खेड़ीवाला, 1962 में सीपीआई के होमी. एफ. दाजी, 1967 में कांग्रेस के प्रकाशचंद्र सेठी, 1971 में कांग्रेस के राम सिंह भाई, 1977 में भारतीय लोकदल के कल्याण जैन, 1980 और 1984 में कांग्रेस के प्रकाश चन्द्र सेठी, तथा उनके बाद 1989, 1991, 1996, 1998, 1999, 2004, 2009 और 2014 में भाजपा की दिग्गज नेता और वर्तमान सौलहवीं लोकसभा की स्पीकर सुमित्रा महाजन उपाख्य ताई ने लगातार आठ बार विजयश्री का वरण किया। 2014 की मोदी लहर में सुमित्रा ताई को 8,54,972 वोट मिले थे, उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस उम्मीदवार सत्यनारायण पटेल को हराया था। पटेल 3,88,071 वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहे थे। सुमित्रा ताई की प्रामाणिकता इसी से सिद्ध हो जाती है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने उनके बारे में सार्वजनिक रूप से हाल ही में कहा है कि- ‘आप सब मुझे प्रधानमंत्री के रूप में जानते हैं। लेकिन बहुत कम लोगों को पता होगा कि हमारी पार्टी में अगर मुझे कोई डांट सकता है, तो वह ताई ही हैं।Ó ताई के विषय में प्रधानमंत्री का यह कथन अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण माना जाना चाहिए। उल्लेखनीय है कि आयु सीमा के बंधन के कारण इस बार ताई चुनाव नहीं लड़ पारही हैं। इस बार 2019 के रण में भाजपा ने उनके स्थान पर इंदौर विकास प्राधिकरण के चेयरमैन और इंदौर नगर निगम के सभापति रह चुके स्थानीय नेता शंकर लालवानी को टिकट देकर मैदान में उतारा है।
लालवानी से मुकाबला करने कांग्रेस खेमे से पंकज संघवी उम्मीदवार बनाए गए हैं। इन्दौर भाजपा का गढ़ है। यहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और कांग्रेस महासचिव प्रियंंका गांधी सहित कई बड़़े नेता प्रचार करने आ चुके हैं। अब देखना यह है कि क्या ताई के प्रत्याशी न होते भी भाजपा अपने गढ़ में एक बार फिर से कमल खिला पाएगी, या फिर यह सीट इस बार कांग्रेस झटक लेगी।

LEAVE A REPLY