/राजेश सत्यम, भोपाल/ सत्रहवीं लोक सभा के लिए होने वाले मतदान के अंंतिम चरण में 19 मई को जिन जगहों पर मतदान होना है उनमें मंदसौर लोक सभा क्षेत्र भी शामिल है। मंदसौर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत विधानसभा की कुल 8 सीटें आती हैं- जावरा, सुवासरा, नीमच, मंदसौर, गरोठ, जावद, मल्हारगढ़, और मनासा। 2018 में हुए विधानसभा चुनावों के परिणाम स्वरूप इन 8 सीटों में से 7 पर भाजपा और 1 पर कांग्रेस का कब्जा है। मंदसौर लोकसभा क्षेत्र में 1957 में पहली बार हुए चुनाव में कांग्रेस के मानकलाल ने जीत हासिल की थी, इसके अगले चुनाव में यह सीट भारतीय जनसंघ के पास चली गई। यह लोकसभा क्षेत्र भाजपा का बहुत मजबूत गढ़ माना जाता है। अब तक कांग्रेस सिर्फ 4 बार ही यहां जीत पाई है। इस सीट की पहचान प्रदेश भाजपा के दिग्गज नेता रहे लक्ष्मीनारायण पांडे के कारण भी ही। वे यहां से 8 बार सांसद रह चुके हैं। 2011 की जनगणना के मुताबिक मंदसौर की जनसंख्या 24,72,444 है, और यहां की 75.49 फीसदी आबादी ग्रामीण क्षेत्र में तथा 24.51 फीसदी आबादी शहरी क्षेत्र में रहती है। सामाजिक दृष्टि से मंदसौर में 16.78 फीसदी आबादी अनुसूचित जाति, और 5.36 फीसदी आबादी अनुसूचित जनजाति की है। 2014 के लोकसभा चुनाव में यहां कुल 16,26,571 मतदाताओं में से 7,88,495 महिला और 8,38,076 पुरुष मतदाता थे। 2014 के चुनाव में यहां कुल 71.40 फीसदी मतदान हुआ था। 2014 की मोदी लहर में भाजपा के सुधीर गुप्ता ने यहां पूर्व में 2009 के लोक सभा का चुनाव जीत चुकी राहुल गांधी की करीबी माने जाने वाली कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन को 3,03,649 वोटों के भारी अंतर से हार का स्वाद चखाया था। तब सुधीर गुप्ता को 6,98,335 वोट तथा मीनाक्षी नटराजन को 3,94,686 वोट मिले थे। इस चुनाव में आम आदमी पार्टी 0.88 फीसदी वोट लेकर तीसरे स्थान पर रही थी। सांसद सुधीर गुप्ता 16वीं लोकसभा में 89 फीसदी समय उपस्थित रहे, और उन्होंने 354 बहस में हिस्सा लिया, 980 सवाल किए और 1 प्राइवेट मेंबर बिल भी पेश किया। भाजपा ने अपने वर्तमान सांसद को एक बार फिर से अपना उम्मीदवार बनाकर जनता के सामने उतारा है। उनकी टक्कर इस बार भी कांग्रेस की मीनाक्षी नटराजन से ही होगी। इस सीट को भाजपा से छीनने के लिए कांग्रेस पूरी तरह से गंभीर है, तथा उसने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। लेकिन अपने इस गढ़ को बचाने में भाजपा भी कोई कसर नहीं छोड़ रही है।

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