आईपीएल में मुंबई-चेन्नई मैच में अंपायर के फैसले पर असंतोष जताने के लिए पोलार्ड पर जुर्माना लगा है. 

हैदराबादइंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में मुंबई और चेन्नई के बीच हुआ फाइनल में मुंबई की एक रन से रोमांचक जीत के बीच कई विवादास्पद फैसले हुए. इन में से एक मुंबई के हरफनमौला कीरोन पोलार्ड की बल्लेबाजी के दौरान अंपायर के वाइड गेंद न देने का फैसला भी रहा. पोलार्ड को चेन्नई के खिलाफ इस मैच में अंपायर के फैसले पर असंतोष जताने के लिये मैच फीस का 25 प्रतिशत जुर्माना भरना पड़ा.

लेवल एक के दोषी पाए गए पोलार्ड
पोलार्ड को आईपीएल आचार संहिता की धारा 2. 8 के तहत लेवल एक के अपराध का दोषी पाया गया. इसके तहत मैच रैफरी जवागल श्रीनाथ का फैसला अंतिम और सर्वमान्य होगा. पारी के आखिरी ओवर में पोलार्ड ने पिच छोड़कर ट्रैमलाइन (वाइड गेंद के लिये चिन्हित) के पास जाकर स्ट्राइक ली जिससे मैच अधिकारी ने उन्हें आगाह किया. तीनों बार अंपायर नितिन मेनन ने गेंद वाइड नहीं दी जिसकी पोलार्ड अपेक्षा कर रहे थे.

इस तरह से जताया असंतोष
तीन गेंद खाली जाने के बाद पोलार्ड ने अपना बल्ला हवा में उछाला. डवेन ब्रावो जब चौथी गेंद डालने जा रहे थे तो पोलार्ड उपहास करते हुए स्टम्प खुला छोड़कर क्रीज की तरफ जाने लगे. अंपायर इयान गूड और मेनन ने उसे इसके लिये फटकार लगाई. पोलार्ड ने उनकी बात सुनी और फिर अगली दो गेंद पर ब्रावो को दो चौके लगाए.

पोलार्ड पहले भी अनोखी वजह से चर्चा में आ चुके हैं
इससे पहले भी पोलार्ड अपने विरोध जताने के तरीके की वजह से चर्चा में आ चुके हैं. एक बार अंपायर से बहस करने पर जब उन्हें फटकार मिली तो वे मैच में अपने मुंह पर पट्टी बांधकर फील्डिंग करते दिखाई दिए थे.

 

धोनी के रन आउट का फैसला भी विवादास्पद हो गया
इस मैच में इसके अलवा चेन्नई के कप्तान एमएस धोनी के रन आउट करार देने का फैसला भी विवादास्पद रहा क्योंकि यह बहुत ज्यादा ही नजदीकी मामला रहा. इस फैसले के लिए थर्ड अंपायर ने काफी समय भी लिया.  इस मैच में मुंबई की टीम निर्धारित 20 ओवरों में केवल 149 रन ही बना सकी. यह स्कोर बड़ा तो नहीं था, लेकिन टीम की गेंदबाजी को देखते हुए यह कॉप्टीटिव स्कोर था. टीम के गेंदबाजों ने इस बात को सही साबित भी किया और मैच आखिरी ओवर में ले जाते हुए रोमांचक तरीके से मैच केवल एक रन से अपने नाम कर लिया.

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