24 सालों के मनमुटाव के बाद एक बार फिर से सब कुछ भूलकर बीजेपी को हराने के लिए सपा-बसपा एक हुई. मैनपुरी में महारैली में मुलायम सिंह यादव और मायावती को एक मंच पर नजर आए. 

नई दिल्ली: राजनीति क्या रंग नहीं दिखाती. उत्तर प्रदेश की सियासत में दो पार्टियां साल 1993 में एक हुईं, पहली बार गठबंधन कर सरकार बनाने में सपा और बसपा कामयाब रही. लेकिन साल 1995 में लखनऊ में हुए गेस्ट हाउस काण्ड के बाद जो हुआ, उसे राजनीति में रूचि रखने वाला हर शख्स अच्छे से जानता है. 24 सालों के मनमुटाव के बाद एक बार फिर से सब कुछ भूलकर बीजेपी को हराने के लिए सपा-बसपा एक हुई. मैनपुरी में महारैली में मुलायम सिंह यादव और मायावती को एक मंच पर नजर आए.

जब मंच पर पहुंचे नेताजी 
मैनपुरी की महारैली को संबोधित करने के लिए महागठबंधन प्रत्याशी मुलायम सिंह यादव जैसे ही मंच पर पहुंचें, उनके सुनने पहुंची जनता ने तालियों के साथ उनका जोरदार स्वागत किया. मंच से उन्होंने भी हाथ हिलाकर लोगों के प्यार को स्वीकार किया. मंच पर सपा नेता मुलायम सिंह के साथ बसपा प्रमुख मायावती और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भी मौजूद थे.

अखिलेश ने मुलायम सिंह को हाथ में दिया माइक
मंच पर सबसे पहले मैनपुरी से महागठबंधन प्रत्याशी और एसपी संरक्षक मुलायम सिंह लोगों को संबोधित करने पहुंचे. जैसे ही वह मंच पर पहुंचे उन्होंने वहां आई जनता का अभार प्रकट किया, लेकिन माइक पर आवाज साफ नहीं होने की वजह से मैदान में दूर बैठी हुई जनता, उन्हें सही से नहीं सुन पा रही थी. लोगों के शोर और जोश को देखते हुए सपा अध्यक्ष मंच से उठकर पोडियम तक आए और पोडियम पर लगे माइक को निकालकर नेताजी (मुलायम सिंह यादव) के हाथों में थमाया, जिसके बाद मुलायम सिंह ने अपनी बात लोगों तक पहुंचाईं.

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