मोदी की नीतियों को गलत बताकर कांग्रेस लगातार कर रही हमले

/समय जगत, भोपाल। लोकसभा चुनाव के लिए तारीखों का एलान होने के साथ ही प्रतिकियाओं का दौर शुरू हो गया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष में राजनीतिक राजनीतिक पार्टियों के द्वारा आरोप-प्रत्यारोप लगने शुरू हो गए हैं। भाजपा जहां केन्द्र सरकार के पांच सालों की उपलब्धियों को जनता के बीच लेकर पहुंच रही है। वहीं, कांग्रेस प्रदेश में मोदी सरकार की नीतियों को गलत बताते हुए जनता के सामने है। ऐसे में सवाल ये है कि मध्यप्रदेश में आखिर कौन से वो मुद्दे हैं जिनके दम पर लोकसभा का चुनाव लड़ा जाएगा या फिर लोकसभा का चुनाव स्थानीय मुद्दों के बजाए राष्ट्रीय मुद्दों पर लड़ा जाएगा।

राष्ट्रवाद का मुद्दा
पुलवामा हमले के पहले के बाद देश के लोगों में का मूड बदला। पुलवामा का बदला लेने के लिए पीएम मोदी ने भारतीय सेनाओं को खुली छूट देने की घोषणा मंच से की। बदले में भारतीय वायु सेना की तरफ से पाकिस्तान के बालाकोट में एयर स्ट्राइक किया। यह मुद्दा बीजेपी को बढ़त दिलाने में अहम भूमिका निभा सकता है। बीजेपी यह दिखाने की कोशिश करेगी कि नरेंद्र मोदी ही एकमात्र ऐसे नेता हैं, जो कठोर फैसले लेकर पाकिस्तान और आतंकवाद से मुकाबला कर सकते हैं। कांग्रेस के कई नेताओं ने एयर स्ट्राइक के सबूत मांगने शुरू कर दिये। मोदी ने मध्यप्रदेश की धार रैली में इसे चुनावी मुद्दा बना दिया। राहुल गांधी खुद आंतकी मसूद अजहर को जी बोलकर भाजपा के निशाने में आ गए हैं। ऐसे में भाजपा इस मुद्दे को लोकसभा में उठाने की कोशिश करेगी तो वहीं, कांग्रेस लगातार यह कह रही है कि पुलवामा में हुए आंतकी हमले के मास्ट माइंड मसूद अजहर को भाजपा की सरकार में छोड़ा गया था अगर सरकार उस आतंकी को नहीं छोड़ती तो आंतकी इस घटना को अंजाम नहीं दे पाते।

किसानों की कर्जमाफी
मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने किसानों की कर्जमाफी का मुद्दा उठाया। जिसका कांग्रेस को फायदा हुआ। मध्यप्रदेश में किसानों का वोट कांग्रेस को मिला और 15 साल बाद राज्य में कांग्रेस की वापसी हुई। ऐसे में राहुल गांधी मध्यप्रदेश में एक बार फिर से किसान कर्जमाफी के नाम पर वोट मांगते नजर आएंगे। वहीं, दूसरी तरफ भाजपा
किसानों की कर्जमाफी को लेकर सरकार पर हमलावर हो गई है। भाजपा कर्ज माफी को एक चुनावी हथकंड़ा बता रही है। किसान कर्जमाफी इस लोकसभा चुनाव में एक बड़ा मुद्दा बन सकता है।
मोदी और राहुल खुद मुद्दा
इस लोकसभा चुनाव को मध्यप्रदेश में मोदी वर्सेज राहुल गांधी बताया जा रहा। भाजपा कार्यकर्ता मोदी को ही मुद्दा बनाकर चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं, कांग्रेस राहुल गांधी के रूप में देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में मुद्दा बना रही है। दोनों ही पार्टियां एक दूसरे के खिलाफ लगातार हमला बोल रहे हैं। भाजपा को यकीन है कि अमित शाह के नेतृत्व में पार्टी पीएम मोदी की लोकप्रियता को वोटों में तब्दील करने में कामयाब होगी। बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद बीजेपी का उत्साह और बढ़ गया है। वहीं कांग्रेस मानकर चल रही है कि मोदी का करिश्मा अब 2014 जैसा नहीं है। क्योंकि राहुल गांधी इस बार ज्यादा परिपक्व नजर आ रहे हैं।

रोजगार का मुद्दा
रोजगार का मुद्दा भी इस बार के लोकसभा चुनाव के दौरान प्रचार में जमकर सुनाई देगा। कांग्रेस रोजगार के लिए लगातार केन्द्र सरकार पर हमला बोल रही है। मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद रोजगार के मुद्दे पर विपक्ष कमलनाथ सरकार पर हमला कर रहा है। प्रदेश के युवाओं को रोजगार देने के लिए कमलनाथ सरकार ने स्वाभिमान योजना शुरू की है। इस योजना के तहत सरकार बेरोजगार युवाओं को गाय हांकने औऱ बैंड बजाने जैसे कामों को रोजगार की श्रेणी में बता रही है। युवा वोटर्स इस चुनाव में अहम भूमिका निभाने वाले हैं। जो पार्टी नई शुरुआत करके युवाओं के लिए नए वादे लेकर आएगी युवा उसकी तरफ आकर्षित हो सकते हैं। दूसरी ओर देश की आधी आबादी यानी महिलाएं इस चुनाव में अहम भूमिका में होंगी। केंद्र सरकार ने टॉयलेट निर्माण, एलपीजी गैस की सुविधा और बलात्कार के मामलों पर सख्ती जैसे कदम उठाए हैं। वहीं, विपक्ष महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे पर लगातार सरकार पर निशाना साध रहा है।

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