इस शोध में आईआईटी, भुवनेश्वर और एनआईटी राउरकेला के वैज्ञानिक शामिल हैं.

वॉशिंगटन: वैज्ञानिकों ने मिट्टी की नमी और तापमान के बारे में पांच दशकों के आंकड़ें जमा करने में सफलता हासिल कर ली है, अब इसकी मदद से किसी क्षेत्र में तूफान की वजह से पड़ने वाले प्रभावों का अधिक सटीक ढंग से पूर्वानुमान लगाया जा सकेगा. गौरतलब है भारतीय मानसून के तहत में गरज के साथ तेज बारिश से थोड़े ही समय में किसी इलाके में दर्जनों इंच की वर्षा हो सकती है और बाढ़ आ सकती है. इसके चलते हजारों लोगों की मौत हो जाती है.

शोध में कहा गया है कि अगर इसका बेहतर तरीके से पूर्वानुमान लग सके कि कब, कहां और कितनी बारिश होगी, तो जान-माल की तबाही बचाई जा सकती है. इस शोध में आईआईटी, भुवनेश्वर और एनआईटी राउरकेला के वैज्ञानिक शामिल हैं.

इन लोगों पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सहयोग से दशकों से मिट्टी की नमी और उसके तापमान के आंकड़े जमा करने में सफलता हासिल की है और इसके लिए उपग्रह तकनीक का भी सहारा लिया गया है. यह अध्ययन वैज्ञानिक पत्रिका ‘साइंटिफिक डेटा’ में प्रकाशित हुई है.

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