बीजेपी, शिवसेना के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत चल रही है.

मुंबई: लोकसभा और विधानसभा चुनावों के मद्देनजर शिवसेना और बीजेपी के बीच जारी उठापठक के बीच शिवसेना ने कहा है कि अगले 48 घंटे में यदि इस चर्चा को अंतिम स्‍वरूप नहीं दिया गया तो शिवसेना अपने उम्मीदवारों का प्रचार अभियान शुरू करेगी. उल्‍लेखनीय है कि बीजेपी, शिवसेना के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत चल रही है. इस कारण ही कल जलगांव जिले के पाचोरा में होने वाली शिवसेना के कार्यकर्ता शिविर को रद किया गया.

इस बीच महाराष्ट्र में बीजेपी ने अब शिवसेना को अपने तेवर दिखाना शुरू कर दिया है. बीजेपी सूत्रों से पता चला है की शिवसेना से बात करने केंद्रीय स्तर कोई भी नेता अब मुंबई में नहीं आएगा. आने वाले चुनाव के लिए गठबंधन से जुड़ी जितनी भी बातें है वह स्थानीय नेता यानी प्रदेश अध्यक्ष रावसाहेब दानवे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ही करेंगे. शिवसेना बीजेपी के साथ सत्ता में होते हुए भी लगातार पीएम नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार को टार्गेट कर रही है. यह अब बीजेपी को अखरने लगा है.

पिछले कई दिनों से दोनों पार्टियों के बीच खुली बयानबाजी तो नहीं लेकिन परदे के पीछे गठबंधन की राजनीति हो रही है. इसके बावजूद भी शिवसेना का बीजेपी को परेशान करने का सिलसिला नहीं रुका है. आए दिन शिवसेना का मुखपत्र सामना में पीएम मोदी, सीएम फडणवीस, यूपी के मुख्यमंत्री योगी और केंद्र सरकार को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे बीजेपी के हलकों में नाराजगी है.

1995 में बना गठबंधन
बता दें कि शिवसेना-बीजेपी 1995 में पहली बार हिंदुत्व के मुद्दे पर एक साथ आई और सत्ता तक पहुंची. उस वक्त बीजेपी के दिवंगत नेता प्रमोद महाजन और गोपीनाथ मुंडे की जोड़ी ने शिवसेना के साथ मिलकर बीजेपी को सत्ता तक पहुंचाया था. उस वक्त से चुनाव के आते ही बीजेपी के नेता उस वक्त मातोश्री पर शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे से मिलते थे और फिर गठबंधन का ऐलान होता था. पिछले साल तक यही हो रहा था. लेकिन जब से पिछले चुनाव में शिवसेना बीजेपी से अलग होकर लड़ी है. तब से पार्टी में बेचैनी है. उद्धव ठाकरे अपना लोहा मनवाने की फिराक में अपने बलबूते पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुके है.

शिवसेना सत्ता में होते हुए भी विरोधी पार्टियों द्वारा किए जाने वाले आंदोलन के मंच पर जाती है और सरकार के खिलाफ आवाज उठाती है. यह बीजेपी के नेताओं को गंवारा नहीं है. जिसको लेकर अब शिवसेना के खिलाफ आवाज उठनी शुरू हो गई है. शिवसेना से अब मातोश्री में जाकर बात नहीं होगी, ऐसा बीजेपी के सूत्र बताते हैं.

बीजेपी अध्‍यक्ष अमित शाह पिछले दो सालों में तीन बार मातोश्री में गए है. बार-बार फोन पर बातें की जा रही है. लेकिन शिवसेना द्वारा बीजेपी पर निशाना साधन थमा नहीं है. बीजेपी के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि अब केंद्रीय स्तर का कोई भी नेता शिवसेना के साथ बात नहीं करेगा, ऐसा फैसला लिया गया है. गठबंधन की जो भी बातें करनी है वह बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष रावसाहेब दानवे, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, वनमंत्री सुधीर मुनगंटीवार ही करेंगे. ऐसा फसला लिया गया है.

महाराष्ट्र के राजनीतिक हलकों में यह काफी गरमागरम खबर है. क्योंकि अपने बंगलानुमा घर मातोश्री से कभी रिमोट कंट्रोल सरकार चलाने वाले शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे अब नहीं रहे है. उनके बेटे पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे इन दिनों बीजेपी से खुला पंगा ले रहे है. बीजेपी यह जानती है कि बाल ठाकरे को वह टाल नहीं सकते थे. लेकिन उद्धव ठाकरे को नियंत्रित करने के लिए राजनीति का इस्तेमाल अब बीजेपी के नेता करने वाले है. जिसके तहत मातोश्री मीटिंग स्किप करने का फैसला लिया गया है.

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