National stats commission चुनाव से ठीक पहले एक और संवैधानिक संस्था के सदस्यों के इस्तीफे से खलबली मच गई है. राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के दो सदस्यों ने अचानक इस्तीफा दिया, जिसके बाद विपक्ष कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है.

केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) से जुड़ा विवाद अभी पूरी तरह से थमा भी नहीं था कि केंद्र सरकार के सामने एक और चिंता का विषय आ गया है. राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (NSC) के दो सदस्यों ने मंगलवार को अचानक इस्तीफा दे दिया. इस्तीफा देने वाले सदस्य पीसी मोहनन का कहना है कि लगातार उनके काम में बाधाएं पहुंचाई जा रही थीं, इसलिए उन्होंने पद छोड़ दिया.

पीसी मोहनन के अलावा जेवी मीनाक्षी ने भी मंगलवार को राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग से इस्तीफा दिया. इसके साथ ही अब इस कमीशन में सिर्फ दो ही सदस्य बचे हैं, जिसमें मुख्य सांख्यिकीविद प्रवीण श्रीवास्तव और नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत शामिल हैं.

सदस्य होने के साथ-साथ पीसी मोहनन इस आयोग के एक्टिंग चेयरमैन भी थे. उन्होंने कहा कि नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस (NSSO) के पास मौजूद बेरोजगारी के आंकड़ों को जारी नहीं करने दिया जा रहा था, जिसकी वजह से वह इस्तीफा देने को मजबूर हुए. उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों को दिसंबर 2018 में जारी करना था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका. अभी तक इसकी जानकारी वेबसाइट पर भी नहीं दी गई है.

पीसी मोहनन ने दावा किया कि राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग ने अपील की थी कि आंकड़ों को जनवरी में ही सभी के सामने जारी रख दिया जाए. गौरतलब है कि रोजगार का मुद्दा बीते काफी समय से चर्चा में है, विपक्षी पार्टियां इसी बहाने नरेंद्र मोदी सरकार को घेरने में जुटी हैं. हालांकि, इन आंकड़ों पर पीसी मोहनन ने किसी भी तरह की टिप्पणी करने से इनकार किया.

मामले पर विवाद बढ़ता देख सरकार ने दोनों अधिकारियों को बात करने के लिए बुलाया है. केंद्रीय मंत्री विजय गोयल का कहना है कि इसमें कुछ भी चिंता वाली बात नहीं है. सरकार हर बार पांच साल का NSSO डाटा जारी करती है लेकिन आयोग के पास सिर्फ एक साल के ही आंकड़े उपलब्ध हैं. इसलिए सरकार का मानना है कि उससे सही आंकड़े सामने नहीं आ पाएंगे.

गौरतलब है कि इससे पहले सीबीआई में दो वरिष्ठ अधिकारियों के झगड़े और आरबीआई गवर्नर के पद से उर्जित पटेल के अचानक इस्तीफे से मोदी सरकार की किरकिरी हुई थी.

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