आरजेडी ने साल 2000 के विधानसभा चुनाव के बाद पहली बार इस सीट से आरजेडी ने अपना उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारा है. इसकी वजह से महागठबंधन में दरार भी पड़ गई है
.

कुशेश्वर कुशेश्वर स्थान सुरक्षित विधानसभा सीट पर हो रहा उपचुनाव रोचक होता जा रहा है. सत्ताधारी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के विधायक शशिभूषण हजारी के निधन से रिक्त हुई इस सीट पर हो रहे उपचुनाव में कांग्रेस और चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी ने अपने उम्मीदवार उतार मुकाबले को रोचक बना दिया है. मुकाबले को चौतरफा बनाने की कोशिशों के बावजूद इस उपचुनाव में जेडीयू और लालू प्रसाद यादव के राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा है.

आरजेडी ने साल 2000 के विधानसभा चुनाव के बाद पहली बार इस सीट से आरजेडी ने अपना उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारा है. इसकी वजह से महागठबंधन में दरार भी भी पड़ गई है लेकिन तेजस्वी यादव को इससे फर्क नही पड़ता. तेजस्वी का कहना है कि यहां से हमारा दावा मजबूत बनता है. शशिभूषण हजारी साल 2010 से लगातार तीन बार यहां से विधायक रहे. 2010 में वो बीजेपी के उम्मीदवार थे तो 2015 और 2020 में वे जेडीयू के टिकट पर चुनाव जीते. एक तरह से देखे तो 2000, 2005 और 2010 में बीजेपी चुनाव जीती तो 2015 और 2020 में जेडीयू.

साल 2015 के चुनाव को छोड़ दे तो यहां राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का दबदबा रहा है. जेडीयू साल 2015 के चुनाव में महागठबंधन में शामिल थी. उपचुनाव में जेडीयू ने शशिभूषण हजारी के बेटे अमन हजारी को टिकट दिया है तो आरजेडी ने अपने पुराने कार्यकर्ता गणेश भारती को मैदान में उतरा है. कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता अशोक राम के बेटे को टिकट दिया है. साल 2020 में खुद अशोक राम मैदान में थे और सात हजार से अधिक मतों से शशिभूषण हजारी से चुनाव हार गए थे.

वहीं, चिराग पासवान ने इस बार भी महिला शक्ति पर दांव लगाया है. चिराग ने अंजू देवी को टिकट दिया है. गौरतलब है कि कुशेश्वर स्थान कुशेश्वर महादेव की वजह से प्रसिद्ध धार्मिक नगरी है. यहां बाबा के आशीर्वाद के बिना कुछ नहीं होता. कहा जाता है कि प्राचीनकाल में यहां कुश का जंगल था उसी जंगल मे कुशेश्वर महादेव की स्वयं उत्पति हुई है. यह इलाका तीन नदियों कोशी कमला और बलान से घिरा हुआ है.

कुशेश्वर स्थान में 32 पंचायतें हैं. आठ पंचायतें बगल के प्रखंड बिरौल में पड़ती हैं. आरजेडी की जीत के लिये तेजस्वी यादव पिछले दो दिन से लगातार प्रचार कर रहे हैं. उनके मुताबिक कुशेश्वर स्थान में कोई विकास नहीं हुआ है. स्वास्थ्य की व्यवस्था नहीं है. कॉलेज नहीं है. सड़को का बुरा हाल है. तेजस्वी यादव ने कहा कि सरकार दावा करती है विकास का लेकिन जमीन पर कोई कार्य नजर नहीं आता.

संजय झा ने तेजस्वी पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें कुछ पता नहीं है. उनके पिताजी (लालू प्रसाद यादव) के शासन में यहां की क्या स्थिति थी, लोगों को दरभंगा जाने में छह घंटे लगते थे. उन्होंने कहा कि आम जनता सबको सुन रही है और अपना मन बना रही है. जातीय समीकरण का पूरा खेल है. गौरतलब है कि इस उपचुनाव के लिए दोनों ही खेमों ने पूरी ताकत झोंक दी है

LEAVE A REPLY