Health Budget 20201 : वित्त मंत्री ने कहा कि मौजूदा समय में इस वैक्सीन का प्रयोग सिर्फ 5 राज्यों तक ही सीमित है. आने वाले समय में इसका प्रयोग देश के बाकी राज्यों में भी किया जाएगा.

नई दिल्ली. सरकार ने जहां कोरोना वायरस (Corona Virus) संक्रमण जैसी महामारी से लोगों को बचाने के लिये के बचाने के लिये कोरोना वैक्सीन के लिये 35 हजार करोड़ की राशि का प्रावधान वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिये किया है. वहीं, न्यूमोकोकल जैसी जानलेवा बीमारियों से भी बच्चों और व्यस्कों को बचाने के लिये तैयारी कर रही है. केंद्र सरकार ने भारत में निर्मित न्यूमोकोल वैक्सीन (Pneumocol) भारत निर्मित उत्पाद से बाल मृत्यु को रोकने की घोषणा की है.

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में अपने बजटीय भाषण में घोषणा करते हुये कहा कि भारत में बाल मृत्यु को रोकने का प्रयास है. भारत में निर्मित न्यूमोकोल वैक्सीन के प्रयोग से हर साल 50 हजार बाल मृत्यु को रोका जा सकेगा. वित्त मंत्री ने कहा कि मौजूदा समय में इस वैक्सीन का प्रयोग सिर्फ 5 राज्यों तक ही सीमित है. आने वाले समय में इसका प्रयोग देश के बाकी राज्यों में भी किया जाएगा.
बताया जाता है कि न्यूमोकोकल बीमारियों की रोकथाम के लिये पीसीवी 13 टीके लगाये जाते हैं.

न्यूमोकोकल कान्जुगेट वैक्सीन (Pneumococcal Conjugate Vaccine) पीवीसी 13 से बच्चों और व्यस्कों दोनों को बचाने का काम किया जाता है. भारत सरकार आने वाले समय में अब  न्यूमोकोल वैक्सीन का प्रसार तेजी से करेगी. बताया जाता है कि न्यूमोकोकल रोग जीवाणुओं द्वारा फैलता है. वहीं, नजदीकी संपर्क से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में यह तेजी से फैलता है. न्यूमोकोकल न्यूमोनिया व्यस्कों में अधिक पाया जाता है. जबकि न्यूमोकोकल मैनिन्जाइटिस बहरापन और मस्तिष्क को ज्याद हानि पहुंचाता है. इससे पीड़ित 10 बच्चों में से करीब एक की मृत्यु हो जाती है.
चिकित्सकों की माने तो न्यूमोकोकल रोग किसी को भी हो सकता है. लेकिन दो वर्ष से कम आयु के बच्चे, 65 साल या इससे अधिक के बुजुर्ग, कुछ बीमारियों से पीड़ित व्यक्ति तथा ध्रूमपान करने वाले व्यक्तियों को इस संक्रमण से अधिक जोखिम रहता है.

इस बीच देखा जाए तो हर साल निमोनिया से करीब 3.5 लाख बच्चों की मौत हो जाती है. उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश में इसको लेकर स्थिति काफी भयावह सामने आई थीं.

इस पर ध्यान देने की जरूरत
बताया जाता है कि इस टीके से पहले अमेरिका में 5 साल से कम आयु के बच्चों की स्ट्डी रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि 700 से ज्यादा मैनिन्जाइटिस के केस रिकार्ड किये गये. वहीं, 13000 के करीब रक्त संक्रमण के केस सामने आये. चैकाने वाले तथ्य यह भी सामने आये कि करीब 200 मौतें न्यूमोकोकल संक्रमण के कारण हो जाती थीं. वहीं टीके के उपलब्ध होने के बाद इन बच्चों में गंभीर बीमारियों में 88 फीसदी की कमी दर्ज की गई.

अब केंद्र सरकार ने न्यूमोकोल वैक्सीन के प्रयोग को अब तेज करने की घोषणा की है. सरकार चाहती है कि इस बीमारी से ग्रसित बच्चों में मृत्यु दर को कम से कम किया जाए. बताते चले कि केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य योजनाओं पर कुल बजट 223846 करोड़ रूपये घोषित किया है जोकि गत वर्ष के बजट 94452 की तुलना में 137 फीसदी ज्यादा है.

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